कुंडा, कालाकांकर और लालगंज ब्लॉक में तैयार हो रहे अरुणिमा, मल्लिका, सूर्या व आम्रपाली प्रजाति के आम अमेरिका, इंग्लैंड, मलयेशिया, पोलैंड, हंगरी और जर्मनी के खान-पान में रस घोलेंगे। इस साल करीब विभिन्न किस्मों के करीब 10 टन विदेशों में भेजे जाने का लक्ष्य है।
पिछले साल लंदन व खाड़ी देशों में कुंडा व लालगंज के छह टन आम भेजे गए थे। बीते साल चौसा, बनारसी, लंगड़ा व दशहरी आम की किस्में निर्यात की गई थीं।
जिला उद्यान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, कुंडा व लालगंज में करीब पांच साल पहले लगाए गए आम के पेड़ों में अच्छे फल लगे हुए हैं। करीब 91154 मीट्रिक टन आम के उत्पादन होने का अनुमान है। विदेशों के साथ ही तमिलनाडु, कर्नाटक समेत दक्षिणी प्रांतों में आम की कई किस्मों को भेजा जाएगा।
कुंडा के रहवई गांव निवासी थोक व्यापारी अकरम बेग ने बताया कि पिछले साल दशहरी, लंगड़ा, सफेदा आम की किस्मों को लंदन व खड़ी देशों में भेजा गया था। जिससे करीब 25 लाख रुपये तक का मुनाफा हुआ था। इस बार आम्रपाली, मल्लिका, सूर्या व अरुणिमा का निर्यात अमेरिका, इंग्लैंड समेत अन्य देशों में किया जाएगा। बीते साल की तुलना में चार मीट्रिक टन अधिक निर्यात का लक्ष्य रखा गया है।
कुंडा के शेखपुर आशिक गांव के किसान लल्लू सिंह ने 30 बीघे में आम की हाइब्रिड किस्में खेतों में लगाई हैं। मौसम अनुकूल होने के कारण आम खूब लगे हैं। विदेश भेजे जाने वाले आम के प्रत्येक पीस को पेड़ में ही बैग से कवर कर दिया गया है। लल्लू सिंह ने बताया कि बीते साल आम से उन्होंने करीब 10 लाख रुपये की कमाई की थी। इस बार आमदनी दोगुनी होने की उम्मीद है।