चुनावी फिजा बनाने व वोटरों को लुभाने के लिए प्रत्याशियों ने जितना बन पड़ा वो सब किया। वोटों की गुणागणित से लेकर साम ,दाम, दंड भेद खूब आजमाए गए। मगर परिणाम मतपेटिका में बंद होने के बाद भी वह अभी शंात नहीं बैठे हैं। चुनाव परिणाम जानने के लिए वह बेचैन हैं। इसके लिए ज्योतिषाचार्यों की मदद ली जा रही है। प्रत्याशी और उनके समर्थक पत्री और जन्मकुंडली लेकर ज्योतिषियों के घरों का चक्कर लगा रहे हैं, जहां ज्योतिष के हिसाब से बलिष्ठ ग्रहों का संयोग बैठाया जा रहा है।
नगर निकाय चुनाव को लेकर इस बार बेल्हा में गजब की सियासी सरगर्मी देखने को मिली। सिंबल मिलने बाद प्रत्याशियों के प्रचार-प्रसार में ईष्टमित्र व रिश्तेदारों तक ने रात-दिन एक कर दिया। चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए सियासत के मंझे खिलाड़ियों की भी मदद ली गई। प्रत्याशी ंउनके बताए रास्ते पर जीत की रणनीति बनाकर मैदान में अंतिम दिन तक डटे रहे। अब चुनाव खत्म होने के बाद पंडितों के यहां पहुंचकर ग्रह-गोचर ठीक कराए जा रहे हैं। बेचैन प्रत्याशी अब सियासी पंडितों से पिंड छुड़ाकर ज्योतिष के विद्वानों की शरण में हैं। उनके खास शार्गिद हाथों में कुंडली लेकर साथ चल रहे हैं। सुबह होते ही ज्योतिषाचार्यों के घरों में भीड़ जुट जा रही है। ज्योतिषी कुंडली व जन्मपत्री में दशम स्थान, दशमेश ग्रह तथा राजयोग दिलाने वाले बलिष्ठ ग्रह राहु की दशा का जोड़ बैठाने मेें लगे हैं। ज्योतिषाचार्य पं. आलोक मिश्र ने बताया कि इन ग्रहों की चाल काफी हद तक जीत और हार तय करती है। सही स्थानों पर अगर बलिष्ठ ग्रह हैं तो 80 प्रतिशत से अधिक संभावना जीत की होती है।