मेडिकल कॉलेज में गोल्डन कार्ड पर कूल्हे का ऑपरेशन करने से चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर दिए और ऑपरेशन के लिए निजी अस्पताल में लेकर जाने को बोलने लगे। इससे नाराज युवक ने जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराए। डॉक्टरों ने आरोप को निराधार बताया है।
कोहड़ौर थाना के पूरे दयाल सूर्यगढ़ निवासी दयाराम वर्मा की मां 60 वर्षीय शिवकली एक मार्च को गिर गई थीं। कूल्हा टूट गया। दयाराम ने अपनी मां को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। चिकित्सक को गोल्डन कार्ड दिखाया। डॉ. सचिन कुमार ने कूल्हे का ऑपरेशन करने की बात कही। परिजन कराने को तैयार हो गए। दयाराम वर्मा का आरोप है कि डॉक्टर मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन करने से इनकार कर दिए। मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित एक निजी अस्पताल में पैसा जमा करने के बाद ऑपरेशन करने को तैयार थे। इससे परेशान होकर दयाराम वर्मा ने शनिवार दोपहर मुख्यमंत्री और प्रधान मंत्री को संबोधित आत्महत्या का पत्र लिखकर खुद जहर खा लिया और मां को भी खिलाने जा रहा था। इसी बीच परिवार के लोगों ने पकड़ लिया। दयाराम को कोहंडौर सीएचसी में भर्ती कराया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉ देवेंद्र सिंह पटेल ने मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। इस मामले में मेडिकल कॉलेज के आर्थो सर्जन डॉ. सचिन कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि शुक्रवार को भी वे ऑपरेशन करने के लिए मरीज को ओटी तक लेकर गए थे। ईसीजी रिपोर्ट खराब होने के कारण एनेस्थीसिया देने से डॉक्टर ने इनकार कर दिया। मुझे प्राइवेट अस्पताल में ले जाना होता तो मरीज को ओटी तक लेकर क्यों जाता। एनेस्थीसिया के डॉ. राकेश ने कहा कि मरीज ओटी टेबल तक शुक्रवार को लाया गया। चेस्ट में संक्रमण और ईसीजी रिपोर्ट बेहद खराब होने के कारण ऑपरेशन टाल दिया गया। ऑपरेशन दो दिन बाद किया जाता, इससे पहले उसका इलाज फिजीशियन करते। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव ने कहा कि दयाराम जहर नहीं खाया है, वह शराब के नशे में है। इसकी सूचना पुलिस को दी जा चुकी है। दोनों डॉक्टरों से बात किया तो पता चला कि मरीज की ईसीजी रिपोर्ट खराब है। ऑपरेशन के दौरान मरीज की जान भी जा सकती थी। इसीलिए ऑपरेशन नहीं किया गया।