प्रतापगढ़ संसदीय सीट पर भले ही भाजपा गठबंधन की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही थी, लेकिन चुनाव से दो दिन पहले जनसभा करने आए सपा मुखिया अखिलेश यादव गेम चेंजर साबित हुए। जीआईसी के मैदान में उनकी जनसभा में उमड़ी युवाओं की भीड़ ने नतीजे तय कर दिए।
सपा मुखिया अखिलेश यादव के जादू के आगे यहां वोटरों को रिझाने आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गृहमंत्री अमित शाह, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद व बृजेश पाठक, केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल व बसपा सुप्रीमो मायावती की दाल नहीं गली।
वैसे तो शुरुआत से ही सपा व भाजपा की टक्कर मानी जा रही थी। कांग्रेस का साथ मिलने के बाद मतों का बंटवारा नहीं हो सका। इसके चलते रोचक मुकाबला देखने को मिला। राजा भैया की चुनाव से दूरी भी सपा के लिए फायदेमंद साबित हुई। अखिलेश की सभा में जनसत्ता दल का झंडा लहराते हुए कार्यकर्ता पहुंचे। जातिगत समीकरण पर पार्टी बेस वोटों के आधार से इतर कुर्मी मतदाताओं के साथ सरोज बिरादरी भी सपा के साथ आ गई। जिले में चुनावी माहौल बनाने व वोटरों को रिझाने के लिए भाजपा, सपा-कांग्रेस गठबंधन के समर्थन में सियासी दिग्गजों ने जनसभाओं में एक दूसरे के खिलाफ हुंकार भरी। एक दूसरे की कमियों को उजागर किया। सपा व भाजपा के नेता एक दूसरे पर सियासी तीर चलाते रहे। सभाओं के माध्यम से जातीय समीकरण बैठाने का भरसक प्रयास किया था। भाजपा की जनसभाओं से लग रहा था कि इस बार दोबारा जीत का इतिहास दोहराया जा सकता है, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। अखिलेश की जनसभा में उमड़ी भीड़ वोट में तब्दील हो गई। जिससे सपा प्रत्याशी की जीत का रास्ता साफ हो गया।