जिले में अरहर के बीज का अकाल पड़ा है। कृषि विभाग में जहां इस वर्ष एक तोला बीज नहीं मिला है, वहीं प्राइवेट दुकानों पर ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। इसलिए अरहर की बुवाई इस वर्ष प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर दलहनी फसल अरहर के उत्पादन पर पड़ेगा। जिले में खरीफ की प्रमुख फसलों में अरहर की खेती बहुतायत मात्रा में होती है। असिंचित इलाकों में अधिकाधिक होेने वाली अरहर की खेती इस वर्ष प्रभावित हो सकती है। कृषि विभाग ने लगभग दस जिलों से अरहर की डिमांड की मगर कहीं भी एक दाना नहीं मिला। कृषि विभाग में अरहर का बीज नहीं मिलने से प्राइवेट दुकानदारों ने फैजाबाद और इलाहाबाद से संपर्क साधा, मगर हर जगह निराशा हाथ लगी।
जो दुकानदार पहले चरण में अरहर का बीज खरीदकर रख लिए थे। वह ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। हालांकि दुकानदारों द्वारा बेचे जा रहे बीज की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारों की मानें तो अरहर की बीज नकली भी बिक रहा है। बीज का जमाव तो हो रहा है, मगर फल देने के समय यह धोखा दे सकते हैं। मामले में उपकृषि निदेशक का प्रभार देख रहे जिला कृषि अधिकारी डीपी सिंह ने बताया कि अरहर के बीज के लिए कई जिलों में संपर्क स्थापित किया गया, मगर सफलता नहीं मिल पाई है। उन्होंने बताया कि सिर्फ प्रतापगढ़ जिले में ही बीज का संकट नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में अरहर के बीज को लेकर संकट गहरा गया है।