मकर संक्रांति 14 जनवरी को हर्षोल्लास, उत्साह और श्रद्धापूर्वक मनाई गई। जगह-जगह खिचड़ी भोज का आयोजन किया गया। आसमान में पतंग बाजी का लोग आनंद लेते देखे गये। इस मौके पर धार्मिक स्थलों पर भी भीड़ का नजारा दिखाई दिया। ट्रेनों और बसों में स्नानार्थियों का रेला रहा। निजी वाहनों पर भी भीड़ देखने को मिली।
मकर संक्रांति का पर्व इस बार सूर्य और शनि के दुलर्भ संयोग का प्रतीक भी था। लोग सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को जल चढ़ाया। थाली सजाकर रखी गई कच्चे दाल, चावल, आलू और नमक को छुआ। बाद में इसे गरीबों को दान दे दिया गया। गरीबों को दान देकर पुण्य कमाने से लोग पीछे नहीं रहे। प्रसाद के रूप में लोगों ने तिल का बना लड्डू, गुड़लइया और गुड़ से बनी पपड़ी ग्रहण किया। रेलवे स्टेशन रोड स्थित शिव मंदिर पर खिचड़ी भोज के आयोजन में जुटे सैकड़ों लोगों ने खिचड़ी का प्रसाद ग्रहण किया। देर शाम तक भोज चलता रहा। बेल्हा देवी मंदिर और शनिदेव धाम में दर्शनार्थियों की भीड़ रही। लोग लाइन में लगकर दर्शन के लिए लालायित दिखे।