अफसरों की लापरवाही से तेजाब पीड़ित एक परिवार को सरकार से मदद नहीं मिल सकी। इसके लिए पीड़ित परिवार के लोग अधिकारियों की चौखट पर दस्तक देते रहे लेकिन उनका नाम मदद वाली सूची में शामिल नहीं हो सका। इससे सरकार की लाभकारी योजना से उसके परिजन वंचित रह गए।
आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र के रामगंज निवासी मनीराम वर्मा की पत्नी फूलन देवी और बहू सुमन पत्नी रमेश वर्मा 9 मई 2014 को घर के भीतर सो रही थीं। आरोप है कि इसी रात पड़ोसी जगदंबा हरिजन ने अगल-बगल सो रही बहू सुमन और सास फूलन के ऊपर तेजाब फेंक दिया था। उस समय परिवार के पुरुष बाहर थे। गंभीर रूप से झुलसी सास बहू को जिला अस्पताल लाया गया था। हालत नाजुक देख डॉक्टरों ने दोनों को इलाहाबाद रेफर कर दिया। वहां 22 मई को सुमन और 29 मई को फूलन की सांसें थम गईं।
इस मामले में पुलिस ने तेजाब फेंकने के आरोपी जगदंबा को धर दबोचा। परिवार की दो महिलाओं की मौत के बाद भी शासन और प्रशासन की ओर से दोनों को आर्थिक मदद नहीं मिली। इस बीच एसिड पीड़ित परिवार के लोगों को शासन से आर्थिक मदद मिलने की जानकारी उनके परिवार के लोगों को हुई तो वे भी मदद की आस लगा बैठे। इसके लिए वे अधिकारियों से भी संपर्क करने पहुंचे लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। मृतका सुमन के पति रमेश ने बताया कि अफसरों ने उसे बताया कि शासन से प्राप्त सूची में उनका नाम शामिल नहीं है।
गौर करने की बात यह है कि वर्ष 2013 की पीड़िता को सरकार से मदद मिली लेकिन वर्ष 2014 की एसिड पीड़ित परिवार को शासन व प्रशासन से रत्ती भर की मदद नहीं मिली। इसके लिए कौन जिम्मेदार है यह बताने वाला कोई नहीं है। इस ओर न तो जनप्रतिनिधियों ने ध्यान दिया और न ही संबंधित अधिकारियों ने। इससे गरीब परिवार के लोगों को सरकारी मदद से वंचित होना पड़ा।