रविवार को लखनऊ में प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हाथों वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार मिलते ही श्यामा की आंखों से आंसू छलक पड़े। बोलीं कि इस तरह के सम्मान की तो उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। मगर अमर उजाला ने इस मकाम पर पहुंचा दिया। परिवारी जन भी इसका पूरा श्रेय ‘अमर उजाला’ को दे रहे हैं। सम्मान से गदगद श्यामा देवी ने संकल्प लिया कि वह दूसरों का जीवन बचाने के लिए हमेशा प्रयास करती रहेगी।
उल्लेखनीय है कि 31 जनवरी 2015 को वाराणसी से नई दिल्ली जाने वाली काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस प्रतापगढ़ के आगे बढ़ रही थी। अंतू रेलवे स्टेशन के निकट पूरे चंदू गांव की गरीब महिला श्यामा देवी को रेल पटरी टूटी दिखी। उधर ट्रेन इधर, टूटी पटरी देख वह परेशान हो उठी। जब कुछ नहीं सूझा तो हादसा टालने के लिए उसने अपनी लाल शाल लहरानी शुरू कर दी। चालक ने खतरे को भांप ट्रेन रोक दी। इस तरह श्यामा देवी ने अपनी सूझ-बूझ से एक बड़ा हादसा टाल न सिर्फ तमाम रेल यात्रियों की जान बचाई बल्कि रेलवे को भी भारी संपत्ति के नुकसान से बचा लिया।
अमर उजाला ने श्यामा देवी के इस साहस को आम जनता और सरकार तक पहुंचाकर लोगों को देश और समाज हित में ऐसे कार्य करने की प्रेरणा दी। साहसी महिला का सम्मान करने अमर उजाला खुद उसके दरवाजे पर पहुंचा। वहां उसकी गरीबी और छप्परनुमा आवास देख अमर उजाला को लगा कि इतना बड़ा काम करने वाली महिला सम्मान की हकदार है। अमर उजाला की पहल पर जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी समेत तमाम लोगों ने श्यामा देवी को सम्मानित किया। पुलिस अधीक्षक बलिकरन सिंह यादव ने वीरांगना लक्ष्मीबाई पुरस्कार के लिए अपनी संस्तुति शासन को भेजी। शासन भी श्यामा देवी के काम का कायल हुआ और पुरस्कार के लिए चुनी गई महिलाओं में उनका नाम शामिल कर लिया था। रविवार को श्यामा देवी अपने बेटे साहिल के साथ मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची।
सीएम के हाथों एक लाख का चेक और सम्मान पत्र मिलते ही श्यामा भावुक हो उठीं। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद घर के लिए रवाना हुई श्यामा ने फोन पर अमर उजाला को सम्मान का श्रेय देने लगीं। बोली कि वह जिंदगी भर दूसरों के जीवन की रक्षा करने के लिए तत्पर रहेंगी। इस तरह का प्रयास करने वाले लोग बहुत से होंगे लेकिन अमर उजाला ने उसके कार्य को जिस तरह समझा उसी से वह आज इस मकाम पर पहुंची है। अमर उजाला ने साबित किया कि वह गरीबों का न सिर्फ हमदर्द बल्कि लोगों के अच्छे काम को दुनिया तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी निभाता है। उसने तो हादसा बचाने का काम इनाम के लिए नहीं किया था बल्कि अपना फर्ज समझा था। मेरे उस काम को अमर उजाला ने पुरस्कार और सम्मान के काबिल समझा। अधिकारियों और समाजसेवियों ने भी सराहा। धन्यवाद अमर उजाला।
संग्रामगढ़ थाना क्षेत्र के रजवापुर निवासी रघुनाथ की पुत्री रीना पाल के ऊपर कॉलेज जाते समय पिछले साल शरारती तत्वों ने एसिड फेंक दिया था। नवाबगंज पुलिस ने छात्रा को उपचार के लिए भेजने के साथ ही कई दिनों की भागदौड़ के बाद आरोपियों को धर दबोचा था। इस घटना के बाद कई छात्राओं ने कॉलेज जाना बंद कर दिया था। रविवार को मुख्यमंत्री के हाथ रीना को भी आर्थिक सहायता मिली। कंधई थाने की महिला उपनिरीक्षक रीता यादव उसे लेकर अपने साथ कार्यक्रम में शामिल होने शनिवार को ही रवाना हो गई थीं।