कोतवाली देहात के रामपुर मुश्तर्का में दीपावली की सुबह हादसा हो गया। घर की साफ-सफाई करते समय छज्जा गिरने से दादी व पोते की मौत हो गई। हादसे में घायल दूसरे पोते की हालत गंभीर बनी हुई है। रामपुर मुश्तर्का निवासी रमाकांत मिश्रा की 48 वर्षीय पत्नी मंजू मिश्रा सोमवार को सुबह घर के बाहर साफ-सफाई कर रही थी। पास में 10 वर्षीय पौत्र आयुष मिश्रा व आठ वर्षीय शिवांश मिश्रा भी बैठे थे। सफाई के दौरान अचानक छज्जा गिर गया, जिसके मलबे में तीनों दब गए। आवाज सुनकर परिजन शोर मचाते हुए दौड़े। ग्रामीणों ने मशक्कत के बाद मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला। सभी घायलों को मेडिकल कॉलेज लाया गया। जांच के बाद चिकित्सकों ने आयुष को मृत घोषित कर दिया। मंजू व शिवांश की हालत गंभीर देख चिकित्सकों ने दोनों को प्रयागराज रेफर कर दिया। इलाज के दौरान प्रयागराज में मंजू मिश्रा ने भी दम तोड़ दिया। सीओ सिटी प्रशांत राज ने बताया कि छज्जा गिरने से दादी व पोते की मौत हुई है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। मकान बनने के बाद छज्जे व रेलिंग का कराया था निर्माण ग्रामीणों के अनुसार, रमाकांत मिश्रा ने कुछ दिनों पहले ही मकान के छत पर छज्जे व रेलिंग का निर्माण कराया था। ताकि बरसात में पानी की बौछार मकान के अंदर तक न जा सके और छत पर बनी रेलिंग से कोई नीचे न गिर सके। सुरक्षा के लिए बनवाई गई रेलिंग व छज्जा परिवार के सदस्याें के लिए काल बन जाएगा। यह किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। पल भर में छिन गईं खुशियां, पसर गया मातम दीपावली के दिन जहां हर घर में दीप जलाने व आतिशबाजी से खुशियां मनाने की तैयारी चल रही थी। वहीं कोतवाली देहात के रामपुर मुश्तर्का में रमाकांत मिश्रा के परिवार पर हादसे ने कोहराम मचा दिया। रमाकांत मिश्रा के दो बेटे अभिषेक व राकेश उर्फ अंकित हैं। राकेश उर्फ अंकित के बेटे आयुष और शिवांश दादी के साथ घर की सफाई में हाथ बटा रहे थे। ग्रामीणों के अनुसार, जिस समय हादसा हुआ। उस समय आयुष छज्जे के नीचे कुर्सी पर बैठा था। दादी से मिठाई व खिलौने की शिवांश जिद कर रहा था। छज्जा व रेलिंग गिरने से कुर्सी चकनाचूर हो गई। काफी दूर तक दादी व पोतों का खून फैला हुआ था। पहले पोते और बाद में पत्नी के मौत की खबर सुनते ही रमाकांश बेसुध हो जाते। कभी पत्नी तो कभी अपने पोतों का नाम लेकर आवाज लगाते हुए रोते रहे। हादसे के बाद आसपास के गांव के लोगों का मजमा जुटा रहा। दो मौतों से इलाके में मातम पसरा रहा। केवल परिजनों के रोने बिलखने की आवाज से ही पसरा सन्नाटा टूटता।