मेडिकल कॉलेज के अफसर भले ही स्टोर में दवाएं होने का दावा करते रहें लेकिन डॉक्टर पर्चियों पर बाहर की दवा लिख रहे हैं। छोटी पर्चियों पर बड़ा खेल चल रहा है। इसका असर मरीजों की जेब पर पड़ रहा है। एक रुपये की ओपीडी पर्ची पर तो कुछ ही दवाएं लिखी जा रही हैं, अधिकतर तो बाहर से लेनी पड़ रही हैं।
मरीजों ने बताया कि डॉक्टरों ने अपने मेडिकल स्टोर तक तय कर रखे हैं। वह चुनिंदा मेडिकल स्टोर से ही दवाएं लेने की सलाह देते हैं। कई बार शिकायत भी हुई लेकिन बाहर से दवा लिखने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।
वहीं, डीएम अभिषेक पांडेय ने बीते दिनों निरीक्षण के दौरान बाहर की दवा लिखने की शिकायत पर डॉक्टरों को चेतावनी दी थी। बावजूद इसके बाहरी दवाएं लिखने का रिवाज खत्म नहीं हुआ।
बोले लोग
पत्नी को बुखार था। डॉक्टर ने संक्रमण बताया। तीन दिनों तक मेडिकल कॉलेज में भर्ती रही। डिस्चार्ज के समय डॉक्टर ने छोटी सी पर्ची पर पांच दिन की दवा लिखी। बाहर मेडिकल स्टोर पर खरीदने पर 12 सौ रुपये खर्च हुए। - सूर्य नारायण, टेकार।
पैर में दर्द हो रहा है। एक रुपये की ओपीडी पर्ची लेकर इलाज कराने ऑर्थो विभाग में जब पहुंची तो डॉक्टर ने तीन दिन की दवा बाजार से खरीदने के लिए कहा। मेडिकल स्टोर संचालक ने 620 रुपये में दवाएं दीं। - सविता पाल, ताला मोड़
वर्जन
अस्पताल में दवा और जांच की सुविधा उपलब्ध है। मरीजों को बाहर से दवा व जांच लिखे जाने का मामला गंभीर है। शिकायत मिलती है तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसकी आंतरिक जांच भी कराई जाएगी। - डॉ. सोमनाथ, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज।
सूर्य नारायण,