प्रतापगढ़। हर माह लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद आंगनबाड़ी केन्द्रों के सभी बच्चों की सेहत नहीं सुधर रही। बाल विकास की कार्यकत्रियों के रिपोर्ट में 81 हजार 796 बच्चे कुपोषण के शिकार बताए गए हैं। एमपीआर ‘मासिक प्रोग्रेस रिपोर्ट’ में कार्यकत्रियों ने 49 बच्चों को अति कुपोषित बताया है।
जिले की 1105 ग्राम पंचायतों में करीब 3247 आंगनबाड़ी केन्द्र हैं। इन केन्द्रों पर कुल लाभार्थी बच्चों की चार लाख 92 हजार 2035 है। इन बच्चों के नास्ते व पोषाहार पर हर माह सरकार लाखों रुपए खर्च कर रही है। प्रति माह कार्यकत्रियां ‘वेइंग मशीन’ पर बच्चों का वजन कर उनकी सेहत की परख करती हैं। प्राप्त स्थिति की रिपोर्ट एमपीआर में दर्ज कर मुख्यालय भेजती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जून माह में शासनादेश के अनुसार बच्चों का कार्यकत्रियों ने वजन किया। पाया गया कि केन्द्रों के 49 बच्चे अति कुपोषित हैं। जबकि 81 हजार 796 बच्चों में साधारण कुपोषण की स्थिति पाई गई। रिपोर्ट में आंगनबाड़ी केन्द्र के एक लाख 75 हजार 251 बच्चों की सेहत नार्मल दिखाई गई है। कार्यकत्रियों की इस रिपोर्ट को विभाग ने निदेशालय भेजा है। जून माह तक आंगनबाड़ी केन्द्रों गर्भवती व धात्री महिलाओं की संख्या 86 हजार 771 बताई जाती है।
जिला अस्पताल में कुपोषित बच्चों के इलाज की विशेष व्यवस्था है। पुरानी इमरजेंसी के बगल आई वार्ड के दूसरे तल पर कुपोषित बच्चों के इलाज का एक विशेष कक्ष है। उस कक्ष में भर्ती बच्चों के साथ आए तीमारदार को प्रति दिन 200 रुपए दिए जाने का प्राविधान हैं।
बाल विकास के जिम्मेदार बताते हैं कि स्वस्थ बच्चों के वजन का मानक है। जन्म के बाद जिस शिशु का वजन दो से ढाई किलो होता है उसे स्वस्थ माना जाता है। इसी तरह केन्द्र पर आने वाले अन्य स्वस्थ बच्चों का वजन सात से साढ़े सात किलो होना चाहिए। जिस बच्चे का वजन इससे कम होता है उसे कुपोषित और ज्यादा कम होने पर अति कुपोषित माना जाता है। जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. आरती सिंह का कहना है कि आंगनबाड़ी केन्द्र पर बच्चों को निर्धारित पोषाहार व नाश्ता दिया जाता है। अभिभावकों को सिर्फ केन्द्रों के भरोसे नहीं रहना चाहिए। उन्हें भी चाहिए कि वे बच्चों के खानपान पर ध्यान दें। कुपोषित बच्चों की सेहत पर कार्यकत्रियां से ज्यादा परिजनों को सजग रहना होगा।