प्रतापगढ़। जिले के कस्तूरबा गांधी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को जुलाई माह में अपना भवन नहीं मिलेगा। ऐसा निर्माण कार्य अधर में लटकने के कारण होगा। जिले के आठ स्कूल ऐसे हैं, जो अनियमितता के दायरे में आने के कारण जांच की गिरफ्त में हैं।
जिले के पंद्रह कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में बालिकाओं को नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है। बालिकाओं को खाना, कपड़ा के साथ ही बिस्तर भी दिया जाता है। पांच कस्तूरबा स्कूलों निजी भवन में चल रहे हैं। जबकि दस कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल भवन बनाने के लिए 65-65 लाख रुपये बीते वित्तीय वर्ष में प्रदान किए गए थे। निर्माण कार्य में भारी अनियमितता मिलने पर आठ स्कूलों के भवन निर्माण पर रोक लगा दी गई है। ठेकेदारों के गुणवत्ता में सुधार नहीं लाने से अफसर पेंच फंसाए हुए हैं। भवन का आलम यह है कि इन भवनों का निर्माण अभी नहीं हो पा रहा है। ऐसी दशा में जुलाई से प्रारंभ होने वाले नए शिक्षासत्र में इन स्कूलों को निजी भवन मिलना संभव नहीं लग रहा है। बीएसए जय सिंह ने बताया कि भवन निर्माण में अनियमितता नहीं होने दी जाएगी। अगर ठेकेदार गुणवत्ता को ध्यान रखकर निर्माण करते हैं तो उन्हें बनाने की अनुमति दी जाएगी।
जिले के सभी कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल 31 मई को बंद होंगे। परिषदीय स्कूलों के लिए जारी कार्यक्रम के अनुसार ही बालिकाओं की परीक्षा होगी। बीएसए ने बताया कि वार्डेन अपने स्तर से पेपर और कापी की व्यवस्था कर बालिकाओं की वार्षिक परीक्षा कराएंगी। अगर किसी वार्डेन ने 31 मई के पहले स्कूल बंद किया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जिले के आठ ब्लाकों में कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में चल रहे हैं। इन स्कूलों का भवन नहीं बनने के कारण विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में संचालित करने का फैसला किया है।