प्रतापगढ़। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का फर्जी अंकपत्र लगाकर नौकरी करने वाले शिक्षामित्र को हाईकोर्ट के आदेश पर बर्खास्त कर बीएसए ने प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश दिया है। वर्ष 2005 से शिक्षामित्र को दिया गया मानदेय ब्याज के साथ वसूल किया जाएगा। इधर, हेराफेरी में शिक्षामित्र का सहयोग करने वाले शिक्षक को भी निलंबित कर दिया गया है।
शिवगढ़ ब्लाक के प्राइमरी स्कूल तौकलपुर में तैनात शिक्षामित्र पवन पाठक पुत्र रामदुलार पाठक ने 29 जून 2005 को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का फर्जी अंकपत्र लगाकर नौकरी हासिल कर ली थी। ग्रामसभा के प्रस्ताव मांगने पर पवन पाठक ने हाईस्कू ल में 426 और इंटरमीडिएट में 298 अंक दर्ज मार्कशीट लगाई थी। आरोप है कि मानदेय का भुगतान होने के बाद स्कूल के प्रभारी अध्यापक की मदद से उसने पुराने की जगह वास्तविक अंक पत्र लगा दिया। यूपी बोर्ड से मिले असली अंकपत्र में हाईस्कूल में 259 और इंटरमीडिएट में 242 अंक मिले थे। गांव के ही हृदयलाल सरोज और मो. नसीम की शिकायत पर मामले की जांच शुरू हुई तो फर्जीवाड़ा सामने आ गया। बीएसए ने पूछताछ की तो वह दो लाख रुपये घूस मांगने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट लखनऊ पहुंच गया। उच्च न्यायालय ने डीएम को पूरे मामले की सुनवाई कर फर्जी अंकपत्र पर नियुक्ति पाने वाले शिक्षामित्र की सेवा समाप्त करने और ब्याज के साथ मानदेय की रिकवरी करने का आदेश दिया। डीएम के निर्देश पर बीएसए जय सिंह ने खंड शिक्षा अधिकारी शिवगढ़ को मानधाता थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने को कहा। बीएसए के मुताबिक शिक्षामित्र के फर्जीवाड़े में सहयोग करने वाले शिक्षक वीरेंद्र कुमार को भी निलंबित कर दिया गया है। खंड शिक्षा अधिकारी शिवगढ़ रवींद्र वर्मा ने प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाने में तहरीर दी है। रविवार को मुकदमा दर्ज होगा।
अंतू इलाके के बंडाखुटार निवासी बेनीमाधव शुक्ल इलाहाबाद में आरक्षी पद पर तैनात रहे हैं। प्रमोशन के बाद वह दरोगा बन गए। उन्होंने विभाग में अपनी जन्मतिथि दो अगस्त 1954 दिखाई है। जबकि गांव के ही बृजेश शुक्ल ने जनसूचना अधिकार के तहत यूपी बोर्ड से सूचना मांगी तो उसमें दो अगस्त 1947 दर्ज थी। बृजेश शुक्ल ने आईजी स्थापना और डीजीपी को शिकायती पत्र देकर पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की है।