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कंप्यूटर देखने को तरस गए बच्चे

Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
Pratapgarh
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प्रतापगढ़। स्कूलों को हाईटेक करने के मंसूबे पर विभागीय अधिकारियों ने पानी फेर दिया है। लाखों रुपये के कंप्यूटर स्कूलों में भेज तो दिए मगर आपरेटर की तैनाती न होने से बच्चे कंप्यूटर को देखने को तरस गए। अधिकांश स्कूलों में कंप्यूटर गत्ते से बाहर ही नहीं निकले हैं जबकि कुछ स्कूलों में खुले में धूल फांक रहे हैं।
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सर्वशिक्षा अभियान की योजनाओं को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग उदासीनता बरत रहा है। मिडिल स्कूलों को हाईटेक करने की योजना पूरी तरह फ्लाप हो गई है। जिले के 88 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों को कंप्यूटर की शिक्षा देने के लिए 35 लाख 20 हजार रुपये की लागत से कंप्यूटर उपकरण विभाग को मुहैया कराए गए। जिला समन्वयक संतोष उपाध्याय की मानें तो 73 स्कूलों में कंप्यूटर तो पहुंच गए मगर 15 स्कूलों का कंप्यूटर सेट अभी तक सत्यापन के अभाव में लटका हुआ है। विभाग ने लाखों रुपये के उपकरण स्कूलों में भेज तो दिए मगर कंप्यूटर की शिक्षा देने के लिए प्रशिक्षक की तैनाती अभी तक नहीं की। दो वर्ष पूर्व स्कूलों में पहुंचे कंप्यूटर उपकरण अभी तक एक भी दिन नहीं चले हैं। अधिकांश स्कूलों में तो गत्ते से बाहर ही नहीं निकले हैं। नगर के पूर्व माध्यमिक विद्यालय शंकरदयाल की प्रधानाध्यापिका सुभद्रा सिंह ने बताया कि कंप्यूटर तो आ गया मगर चलाने वाला कोई नहीं है। इसलिए अभी तक गत्ते से बाहर निकाला ही नहीं गया है। विद्यालय की छात्रा सुमन, श्वेता, पूजा, वंदना की मानें तो प्रधानाध्यापिक कक्ष में गत्ते में कंप्यूटर रखा हुआ है। कंप्यूटर शिक्षा की बात तो दूर हम लोगों ने तो देखा तक नहीं है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय बालिका पल्टनबाजार के सहायक अध्यापक राम सजीवन मौर्य ने चद्दर से ढंके कंप्यूटर को दिखाते हुए कहा कि आपरेटर के अभाव में नहीं चल रहा है। प्रधानाध्यापिका मोमिना बेगम ने बताया कि कंप्यूटर आपरेटर के बिना बच्चों को कंप्यूटर की शिक्षा देना संभव नहीं है।
मानधाता विकास खंड के पूर्व माध्यमिक विद्यालय गाजीपुर, मिश्रपुर, सरायराजा, कटरागुलाबसिंह, नारायणगंज और बेलखरनाथधाम के पूर्व माध्यमिक विद्यालय उडै़याडीह, फेनहा, कांपा, लौव्वार, वशीरपुर, गहरीचक, अमरपुर, छीटपुर विद्यालयों में कंप्यूटर उपकरण पहुंच गए हैं। इनमें अधिकांश विद्यालयों में कागज पर तो विद्युतीकरण हो गया है मगर स्कूल में बल्ब आज तक नहीं जला है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एसटी हुसैन ने बताया कि कंप्यूटर चलाने की जिम्मेदारी शिक्षकों को निभानी होगी। जल्द ही शिक्षकों को प्रशिक्षित कर बच्चों को शिक्षा दी जाएगी।
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कंप्यूटर खरीदारी में व्यापक खेल किया गया है। घटिया कंप्यूटर उपकरण की खरीद होने से कुछ विद्यालयों में लगते ही तोबा बोल रहे हैं जबकि कई स्कूलों में कंप्यूटर चलाने का शिक्षकों ने प्रयास किया मगर वह स्टार्ट ही नहीं हुआ।
सर्वशिक्षा अभियान के तहत प्रत्येक स्कूलों में बिजली पहुंचाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने 2250 रुपये की दर से विद्युत विभाग को धनराशि प्रदान की है। मगर बिजली विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि अभी तक हजारों स्कूलों तक बिजली नहीं पहुंची है। इससे पठन-पाठन की दृष्टि से अग्रणी विद्यालयों में कंप्यूटर उपकरण नहीं पहुंचे हैं।
सेवानिवृत्ति के कगार पर पहुंचने वाले शिक्षकों को जब कंप्यूटर प्रशिक्षण लेने की बात कही जाती है तो वे बीमार हो जाते हैं। विभाग ने कंप्यूटर पाने वाले विद्यालयों के शिक्षकों को कई बार कार्यालय में बुलाकर प्रशिक्षित करने की बात कही मगर वे बहाना बना देते हैं।
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