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विभाग के लिए चुनौती बने ‘विकलांग’ शिक्षक

Tue, 13 Nov 2012 12:00 PM IST
Pratapgarh
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प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ में कई ‘विकलांग’ शिक्षक अफसरों को चुनौती दे रहे हैं। विकलांगता की जांच के लिए साल भर से ऐसे शिक्षकों को बुलाया जा रहा है, लेकिन मेडिकल बोर्ड के सामने प्रस्तुत होने से वे कतरा रहे हैं।
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चार वर्ष पूर्व विशिष्ट बीटीसी के तहत प्रशिक्षित स्नातकों का चयन किया गया था। छह माह की ट्रेनिंग के बाद उन्हें प्राथमिक विद्यालयों में तैनाती दे दी गई। देखने में भले चंगे शिक्षक कागजों में विकलांग हैं। यह बात अन्य जिलों से उठने के बाद शासन ने सभी विकलांग शिक्षकों की जांच मेडिकल बोर्ड से कराने का निर्णय लिया।
प्रतापगढ़ में ऐसे 36 शिक्षक चिह्नित किए गए, लगातार नोटिस के बाद 22 शिक्षक मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित हुए। लखनऊ स्थित मेडिकल बोर्ड की जांच में 7 शिक्षक अयोग्य पाए गए। लेकिन 14 शिक्षक ऐसे हैं जो तीन साल बाद भी अभी तक मेडिकल बोर्ड के सामने प्रस्तुत नहीं हुए हैं। इस संबंध में सीएमओ की ओर से लगातार बीएसए को पत्र भेजा गया पर नतीजा सिफर रहा। बोर्ड पहले तिथि निश्चित करके विकलांग शिक्षकों का बुलाता था। लेकिन आखिरी बार थक हारकर सीएमओ की ओर से यह पत्र भेजा गया कि कार्य दिवस में किसी भी गुरुवार को मेडिकल बोर्ड के सामने प्रस्तुत होकर अपना परीक्षण करा सकते हैं।
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बीईओ मुख्यालय आईसी चौहान ने कहा कि मेडिकल बोर्ड के सामने प्रस्तुत न होने वाले शिक्षकों को सेवा समाप्ति का नोटिस जारी की गई थी। जो शिक्षक बोर्ड के समक्ष अभी तक उपस्थित नहीं हुए हैं उनको एक और मौका दिया जाएगा।
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