प्रतापगढ़। शहर में खौफ का पर्याय बना फ्रैक्चर गैंग पुलिस लाइन के पीछे रहता है। यहां रहने वालों ने पुलिस लाइन की बाउंड्री तमाम स्थानों से तोड़कर रास्ता बना रखा है। एके-47 गायब होने के बाद पुलिस का सारा ध्यान पुलिस लाइन के मुख्य गेट पर तो है, लेकिन इन रास्तों से निकलने वाले शातिरों पर कोई रोकटोक नहीं है।
पुलिस लाइन से एके-47 गायब होने के मामले में कई दिनों तक लीपापोती की जाती रही। मीडिया को भनक लगने पर मामला उजागर हो गया। घटना के दो माह बाद भी एके-47 का जिला पुलिस को सुराग नहीं लगा। कटघरे में खड़े अफसरों ने इस मामले से लोगों का ध्यान हटाने के लिए मुख्य गेट पर कड़ा पहरा लगा पत्रकारों के पुलिस लाइन में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। झुंझलाहट ऐसी कि त्योहारों के मद्देनजर आयोजित शांति कमेटी की बैठक में भी पत्रकारों को भीतर नहीं जाने दिया गया। कुछ पुलिस अफसरों ने कवरेज के लिए मीडिया को बुलाने की कोशिश की लेकिन वे कामयाब नहीं हो सके। उधर जिस पुलिस लान के गेट पर इतना कड़ा पहरा है उसमें अनगिनत स्थानों पर सेंध लगी है। पुलिस लाइन के पीछे की ओर फ्रैक्चर गैंग ने ठिकाना बनाया हुआ है। दहिलामऊ और भुलियापुर के लोग पुलिस लाइन की दीवार तोड़कर बनाए गए रास्ते शहर आते हैं। सड़क से आने की दशा में उन्हें अंबेडकर चौराहे तक जाना होगा जबकि पुलिस लाइन से होकर सीधे राजापाल टंकी चौराहे के करीब पहुंच जाते हैं। पुलिस लाइंस के भीतर से केवल एके-47 ही नहीं, कंप्यूटर और इलेक्ट्रानिक उपकरण भी चोरी हो चुके हैं। गेट पर सुरक्षा बढ़ाने वाले अधिकारी तोड़ी गई बाउंड्री पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
पुलिस अधीक्षक किरण एस. का कहना है कि पत्रकारों को ही नहीं किसी भी बाहरी के पुलिस लाइन में प्रवेश पर रोक है। जैसे अन्य बाहरी लोग लाइन के भीतर जाते हैं वैसे पत्रकार भी जा सकते हैं लेकिन हर समय नहीं, क्योंकि वहां पुलिस कर्मियों का परिवार रहता है। रही बात बाउंड्री टूटने की तो उसे बिना बजट के नहीं बनवाया जा सकता। बजट मिलने पर ही इसे बनवाया जाएगा।