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राज्य विवि की परीक्षा के टाइम टेबल में गड़बड़ी

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राज्य विवि की परीक्षा के टाइम टेबल में गड़बड़ी
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बीए, बीएससी के बदल गए प्रश्नपत्र, परीक्षार्थी परेशान
प्रतापगढ़। राज्य विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की लापरवाही से परीक्षार्थियों की परेशानी बढ़ गई है। परीक्षा विभाग ने बीए और बीएससी के प्रश्नपत्रों का नाम बदलकर टाइम टेबल जारी कर दिया है। जिससे हजारो परीक्षार्थी असमंजस की स्थिति में है।
राज्य विश्वविद्यालय प्रयागराज की परीक्षाएं शुरू होने में एक माह से भी कम का समय शेष है। वहीं परीक्षार्थी परीक्षा की तैयारी करने के बजाए टाइम टेबल को लेकर परेशान हो गए हैं। टाइम टेबल में गड़बड़ी होने से परीक्षार्थी सही जानकारी प्राप्त करने के लिए कालेज के शिक्षकों के साथ विश्वविद्यालय में फोन लगाकर जानकारी ले रहे हैं, लेकिन सही जानकारी उन्हें नहीं मिल पा रही है। परीक्षा टाइम टेबल में गड़बड़ी का मामला यह नया नहीं है। हर बार कुछ न कुछ गड़बडिय़ां परीक्षार्थियों के लिए चिंता कारण बन जाती है। परीक्षा 6 मार्च से शुरू होने जा रही है, लेकिन एक बार फिर विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग ने गलत टाइम टेबल जारी कर दिया है। विश्वविद्यालय द्वारा जारी टाइम टेबल देख शिक्षक और छात्र-छात्राएं परेशान हो गए हैं। बीएससी तृतीय वर्ष के वैकल्पिक प्रश्नपत्र जियोमेट्री एंड टेंसर का नाम बदलकर डिफ्र्रेशियल जियामेट्री एंड एनालिसिस अंकित किया गया है।बीए प्रथम व द्वितीय वर्ष शिक्षाशास्त्र के पाठयक्रम में दो प्रश्नपत्रों की जानकारी दी गई है लेकिन टाइम टेबल में तीन प्रश्नपत्र अंकित है। छात्रों का कहना है कि शिक्षाशास्त्र में दो प्रश्नपत्रों के साथ प्रयोगात्मक परीक्षा होती है लेकिन विश्वविद्यालय के टाइम टेबल पाठ्यक्रम अनुरूप न होने से भ्रम की स्थिति बनी हुई है। वहीं कालेज शिक्षक के साथ विश्वविद्यालय से भी टाइम टेबल के बारे में सही से जानकारी नहीं मिल पा रही है।
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कुसमी प्रधान के खिलाफ कार्रवाई न करने का निर्देश
प्रतापगढ़। सदर विकासखंड के कुसमी प्रधान के प्रार्थना पत्र पर उच्च न्यायालय ने जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि प्रधान के खिलाफ अपील निस्तारण तक कोई कार्रवाई न की जाए। ग्राम प्रधान नसरीन के पिछड़ी जाति प्रमाण पत्र को जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच समिति के निर्णय के बाद 24 जनवरी को निरस्त कर दिया गया था। जिसे नसरीन ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की। जहां से 11 फरवरी को उच्च न्यायालय की ओर से आदेश पारित किया गया कि 90 दिन के भीतर अपीलीय कोर्ट में प्रधान अपील करें। अपील के निस्तारण न होने तक जिला प्रासन प्रधान के खिलाफ कोई उत्पीडनात्मक कार्रवाई न करें।
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