तेल के दामों में लगी आग, थमने लगे ट्रकों के पहिए
जनता भी हो रही परेशान, कैसे होगी जोताई बुआई
राहत न मिली तो मालभाड़े में होगी बढ़ोत्तरी
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। पेट्रोलियम पदार्थों में हो रही बढ़ोत्तरी ने लोगों का बजट बिगाड़कर रख दिया है। इसके चलते 10 फीसदी ट्रक व मिनी ट्रकों के साथ ही दो पहिया वाहनों के चक्के भी थम गए हैं। किसान भी पेट्रोलियम पदार्थों में इजाफे को लेकर हैरान हैं। वहीं आम व खास लोग भी वाहनों का प्रयोग करने को मजबूर हो गए हैं। ऐसे में दिन ब दिन महंगाई बढ़ती जा रही है, जिसका आम व खास सभी पर पड़ रहा है।
रविवार को जिले में डीजल के 73.46 पैसे पहुंच गए हैं। वहीं पेट्रोल केे दाम में 56 पैसे इजाफे के साथ ही कीमत 81.04 पैसे के रिकॉर्ड पर पहुुंच गया है। महंगाई का सबसे ज्यादा असर पब्लिक ट्रांसपोर्ट और माल वाहक वाहनों पर हुआ है। ट्रक आपरेटर्स यूनियन के जिलाध्यक्ष विजय सिंह ने कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ने से मालवाहक वाहन के संचालन पर असर पड़ रहा है। अभी ग्राहक बढ़े हुए रेट के हिसाब से किराया देने को तैयार नहीं हैं। जहां अभी तक लोगों को 12 हजार रुपये माल भाड़ा पहुंचाने पर मुनाफा मिलता था। अब 5500 रुपये आकर ठहर जा रहा है। इसका असर सभी पर पड़ रहा है। यदि यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब लोगों को मुनाफा न होने की दशा में वाहनों का संचालन ठप कर देना पड़ेगा। शहर के पूरे पितई, चिलबिला, जोगापुर में बहुत से ट्रक और मिनी ट्रक गैराज व पेट्रोल पंप पर खड़े हो गए हैं। लोगों को इतनी महंगाई का भरोसा नहीं था। नवंबर में किसान गेहूूं बोने की तैयारी करने लगेगा। उसके ऊपर सिंचाई से लेकर जोताई तक का भार पड़ेगा। पेट्रोलियम पदार्थों की महंगाई से कोई भी अछूता नहीं रहेगा।
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किसानों की महंगी हो जाएगी जोताई व सिंचाई
डीजल के दामों में यदि ऐसे ही इजाफा होता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब किसानों को सिंचाई और जोताई के लिए अधिक रुपये देने होंगे। डीजल के बढ़े दाम को देखते ही ट्रैक्टर मालिक रेट बढ़ाने की तैयारी में दिख रहे हैं, जो किसान डीजल से पंपिंग सेट चलाकर खेतों की भराई व सिंचाई करते हैं। उन्हें भी महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी।
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टेंपो व टैक्सी का बढ़ा किराया
पेट्रोल व डीजल के दामों में इजाफा देखते हुए टैक्सी व टेंपो चालकों ने किराया बढ़ा दिया है। 10 से लेकर 11 किमी दूरी तक चलने वाली टैक्सी अब प्रतिकिमी की दर से चलने लगी है। इनोवा जैसी बड़ी गाड़ी अभी तक 12 रुपये प्रति किमी चलती थी लेकिन अब वह 15 रुपये प्रति किमी वसूलने लगी है। टेंपो चालकों ने भी रेट बढ़ा दिया है।
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माल वृद्धि में ट्रांसपोर्टरों ने दिए संकेत
लगातार माल वृद्धि में ट्रांसपोर्टरों ने माल भाड़े में वृद्धि के संकेत दिए हैं। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि सरकार ने उनके कारोबार को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है जो महंगाई की आग में घी का काम कर रहा है। यदि ऐसे ही हालात रहे तो जल्द ही माल भाड़े में वृद्धि का निर्णय लिया जाएगा। छोटे व बड़े वाहन संचालकों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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पेट्रोल और डीजल भी लोगों की आम जरूरत में शामिल हो गया है। इसकी महंगाई को दरकिनार नहीं किया जा सकता। सरकार को पेट्रोलियम पदार्थों की महंगाई निर्धारित करनी चाहिए, वहीं पब्लिक को भी डीजल व पेट्रोल का रेट बढ़ा देख उपभोग कम कर अपना बचत करना होगा।
रतन सिंह
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10-10 पैसे महंगाई का शोर मचाने वाले लोग अब मुंह पर ताला लगाकर बैठे हैं। रोजाना बढ़ती महंगाई को रोकना तो दूर सरकार गंभीरता दिखाने तक को तैयार नहीं हैं। आम जनता की परेशानी से अलग राजनीतिक दल बहस में समय बर्बाद कर रहे हैं।
आलोक
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सरकार का फोकस महंगाई कम करने पर होना चाहिए। बढ़ती महंगाई से समाज का हर तबका परेशान है। इससे सरकार पब्लिक की कसौटी नहीं उतर रही। आम जनता महंगाई की दोहरी मार झेल रही है।
मुख्तार
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सरकार महंगाई के मुद्दे पर अब फेल होते दिख रही है। दिन प्रतिदिन बढ़ती महंगाई ने घर का बजट बिगाड़ दिया है। वाहनों के डीजल-पेट्रोल पर होने वाला खर्च हर माह अधिक बढ़ता जा रहञा है। सरकार को महंगाई पर कंट्रोल करने का प्रयास करना चाहिए।
एके सिंह
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पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत बढने से मध्यम वर्ग अछूता नही है। गैस सिलेंडर रिफिल कराने में पसीना आ रहा है। डीजल की कीमत बढ़ने से अब माल भाड़ा बढ़ेगा। जिससे हर वर्ग के लोगों की जरूरत की सामग्री का रेट बढ़ जाएगा। माल ढुलाई की महंगाई से उपभोक्ता ही प्रभावित होंगे।
मुराद अहमद
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पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी का असर व्यापार पड़ेगा। गरीब आदमी भी इससे अछूता नहीं रहेगा। सरकार को चाहिए के वह पेट्रोलियम पदार्थों को स्थिर करें ताकि आम व खास को होने वाली दिक्कतें दूर हो सकें।
श्याम आसरे तिवारी।