अप्रैल से जून तक ओवरलोड और फाल्ट के कारण जिले में 850 ट्रांसफॉर्मर फुंक गए। जून में भीषण गर्मी के कारण बिजली की खपत 190 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई। जबकि अप्रैल माह में बिजली की खपत 140 से 145 मिलियन यूनिट के बीच थी। उमस भरी गर्मी में एसी, कूलर, पंखे और फ्रिज के चलने से अप्रैल के सापेक्ष जून में 45 मिलियन यूनिट अधिक बिजली की खपत रही। लाइनलॉस करीब 25 फीसदी तक रहा।
जनपद के प्रतापगढ़, लालगंज, कुंडा और रानीगंज विद्युत वितरण खंडों में सबसे अधिक ट्रांसफाॅर्मर 63 और 100 केवीए के फुंके। 63 केवीए के करीब 350 ट्रांसफाॅर्मर ओवरलोडिंग नहीं झेल पाए। 100 केवीए के 300 ट्रांसफाॅर्मर खराब हुए। बाकि 25 एवं 250 केवीए के ट्रांसफाॅर्मर जले हैं। ओवरलोड ट्रांसफाॅर्मरों की फरवरी में सही ढंग से मरम्मत नहीं होने के कारण भी खराबी आई। मुंबई रिफाइनरी से 30 हजार लीटर के सापेक्ष महज 24 हजार लीटर की ट्रांसफाॅर्मर आयल वर्कशॉप पहुंचा। जिस कारण खराब तेल को शोधित कर किसी तरह से ट्रांसफाॅर्मरों को चलाया गया। जिस कारण बिजली की खपत बढ़ने से लोड को ट्रांसफाॅर्मर झेल नहीं सके।
ट्रांसफाॅर्मर की खराबी के लिए पांच जेई को दिया था नोटिस
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी के निर्देश पर तत्कालीन अधीक्षण अभियंता सत्यपाल ने ट्रांसफाॅर्मरों में खराबी के लिए पांच जेई को नोटिस देकर आख्या मांगी थी। साथ ही निर्देश दिया था कि यदि ट्रांसफाॅर्मर में खराबी आई तो इसकी जिम्मेदारी जेई की होगी। उन्हें अपने वेतन से ट्रांसफाॅर्मरों को दुरुस्त कराना होगा।
बिजली की खपत बढ़ने और ओवरलोड होने के कारण ट्रांसफाॅर्मरों में खराबी आई है। शासन के निर्देश के अनुसार 48 घंटे के भीतर ट्रांसफाॅर्मरों को दुरुस्त कराया गया। साथ ही अतिरिक्त ट्रांसफाॅर्मर लगाकर बिजली आपूर्ति को बहाल कराया गया।
- छैल बिहारी, अधीक्षण अभियंता।