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डीएपी के इंतजार में ठप हुई गेहूं की बुवाई 18-07-35

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डीएपी के इंतजार में ठप हुई गेहूं की बुवाई
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समितियों पर नहीं है डीएपी, प्राइवेट में बिक रही है नकली खाद
ठगे जा रहे किसान, अफसरों ने साधी चुप्पी
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जिले की साधन सहकारी समितियों और सरकारी बिक्री केंद्रों में पखवारे भर से डीएपी का एक दाना नहीं है। इससे गेहूं की बुवाई पूरी तरह ठप हो गई है। प्राइवेट दुकानों पर नकली डीएपी बेचकर किसानों को ठगा जा रहा है। इफको की लापरवाही की स्थिति यह है कि जिला प्रशासन ने डीएपी की मांग की थी, मगर उसने यूरिया की रैक भेज दी। इससे जिले के अफसर भी अपने को असहाय महसूस कर रहे हैं।
रबी की बुवाई के लिए जिले को 11,256 मीट्रिक टन डीएपी की मांग होती है, मगर अभी तक जिले को मात्र 620.28 मीट्रिक टन ही डीएपी मिली है। आलम यह है कि जिले के सरकारी बिक्री केंद्रों पर 15 दिन से डीएपी खाद नहीं है। साधन सहकारी समितियों, उपभोक्ता और पीसीएफ केंद्रों पर डीएपी नहीं मिलने से हताश किसान प्राइवेट दुकानों पर लेने को बाध्य हैं। डीएपी का बिक्री दर 1450 रुपये 50 किग्रा की बोरी है, मगर प्राइवेट दुकानों में 1600-1800 रुपये की दर से बेची जा रही है। दरअसल, डीएपी की किल्लत का पूरा लाभ निजी दुकानदार उठा रहे हैं। चौंकाने वाली बात तो यह है कि जिला प्रशासन को जहां डीएपी नहीं मिल रही है, वहीं निजी दुकानों में भरपूर खाद उपलब्ध है। सवाल यह उठता है कि जब समितियों तक खाद नहीं पहुंच रही है, तो प्राइवेट दुकानों पर खाद कहां से आ गई। बेलखरनाथधाम ब्लाक के पूर्व बीडीसी सदस्य सरयू प्रसाद तिवारी और संडवा चंद्रिका के पूर्व प्रधान नागेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि बाजार में बिकने वाली अधिकांश डीएपी खेतों में डालने के बाद उनके दाने नहीं गल रहे हैं।
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नकली खाद मिलने पर सचिव के खिलाफ दर्ज कराया था केस दर्ज
संडवा चंद्रिका विकास खंड के साधन सहकारी समिति पचखरा में पिछले वर्ष नकली खाद मिलने पर जिला कृषि अधिकारी ने सचिव के खिलाफ नगर कोतवाली में केस दर्ज कराया था। शहर के चौक इलाके में भी जिला प्रशासन नकली खाद का भंडाफोड़ कर चुका है।

खाद और बीज नमूने हो चुके हैं फेल
जिला कृषि अधिकारी ने पिछले साल खाद और बीज के जो नमूने लिए थे। उनमें खाद के तीन और बीज के दो नमूने फेल होने पर दुकानों के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए थे। वहीं इस वर्ष अभी जांच अभियान नहीं चला हैं।
इनसेट--------
सात दिसंबर को रैक आने की है संभावना
विभाग और जिला प्रशासन लगातार डीएपी की मांग शीर्ष अधिकारियों से कर रहा है, इसके बावजूद डीएपी की रैक नहीं आ रही है। फिलहाल अधिकारियों का दावा है कि सात दिसंबर तक डीएपी की रैक आने की संभावना है।
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वर्जन-------
जिले में डीएपी खाद की बेहद कमी है। जिला प्रशासन ने कई बार मांगपत्र भेजा, मगर अभी तक रैक नहीं आई है। अधिकारियों से जो वार्ता हुई है, उसके मुताबिक सात दिसंबर तक रैक पहुंचने की संभावना है।
अमित पांडेय, सहायक निबंधक, सहकारिता
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