मरीजों को सस्ते दर पर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए जिले के सरकारी अस्पतालों में डेढ़ साल बाद भी प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र नहीं खोले जा सके। इसके चलते मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। जनपद के 66 सरकारी अस्पतालों में सिर्फ तीन अस्पतालों में ही जनऔषधि केंद्रों का संचालन हो रहा है।
63 अस्पतालों में अभी भी इसकी शुरुआत नहीं हो सकी है। इसके चलते मरीजों को मजबूरी में अस्पताल के बाहर स्थित मेडिकल स्टोरों से महंगे दाम पर दवाएं खरीदनी पड़ रही है। जबकि प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र पर मिलने वाली जेनेरिक दवाएं सस्ती होती हैं।
एक ही जगह मरीजों का इलाज और सस्ते दर पर दवाएं मुहैया कराने के लिए शासन ने स्वास्थ्य विभाग को जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र खोलने का निर्देश दिया था। इन केंद्रों पर सिर्फ जेनेरिक दवाएं मिलती हैं। मरीजों को सस्ते दर पर दवाएं मुहैया कराई जाती हैं। दवा के रैपर पर भी प्रधानमंत्री जनऔषधि लिखा होता है।
इस योजना की शुरुआत हुए डेढ़ साल से अधिक का समय बीत गया, लेकिन अभी तक जिले में सिर्फ जिला व महिला अस्पताल के साथ ही रानीगंज सीएचसी में ही जनऔषधि केंद्र की स्थापना हो सकी। 63 अस्पतालों में अभी भी केंद्र स्थापित नहीं हो सके। जिसके चलते मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। उन्हें अस्पताल के बाहर स्थित मेडिकल स्टोर से महंगे दाम पर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने सबकुछ जानते हुए भी चुप्पी साध रखी है। जबकि शासन का स्पष्ट आदेश था कि सभी सीएचसी और पीएचसी में मरीजों की सहूलियत के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की स्थापना कराई जाए। लोकसभा चुनाव से कुछ पहले ही जिला व महिला अस्पताल के साथ ही रानीगंज सीएचसी में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोला गया।
वहीं लालगंज, सांगीपुर, उदयपुर के साथ दिलीपपुर में स्थित सीएचसी से कुछ दूरी पर जनऔषधि केंद्र का संचालन हो रहा है। मरीजों को इसके बारे में जानकारी तक नहीं है।
क्या हैं जेनेरिक दवाएं
बाजारों में बिकने वाली दवाएं प्राइवेट कंपनियों की होती हैं। एक ही दवा को कंपनियां अलग-अलग नाम से बेचती हैं। उन्होंने दवाओं का रेट भी अपने हिसाब से तय कर रखा है। डॉक्टर, एमआर और मेडिकल स्टोर संचालकों को दवाओं की बिक्री पर कमीशन देती हैं। वहीं प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र पर मिलने वाली जेनेरिक दवाओं पर किसी कंपनी का नाम नहीं होता है। प्रति पत्ते की सेलिंग पर स्टोर संचालक को 50 पैसे से लेकर एक रुपये तक ही कमीशन मिलता है।
चार रुपये में एक पत्ता पैरासिटमॉल, बाहर 45 रुपये में
प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र पर मिलने वाली दवाएं बाहर मिलने वाली दवाओं से बहुत सस्ती होती हैं। बाजार में पैरासिटामाल का एक पत्ता 20 से 45 रुपये में मिलता है, वहीं प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र पर चार रुपये पत्ता पैरासिटामाल मिलता है। इसी तरह आयरन का सीरफ 49 रुपये तो महिलाओं के प्रयोग में आने वाली नैपकीन 10 रुपये में मिल जाता है।
जिले में दस प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र का हो रहा संचालन
जनपद में दस प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र का संचालन हो रहा है। लालगंज, सांगीपुर, दिलीपपुर, शुकुलपुर गड़वारा, कादीपुर, पल्टन बाजार, जिला व महिला अस्पताल के साथ रानीगंज सीएचसी में केंद्र खोले गए हैं।
प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र का लाइसेंस लखनऊ से जारी किया जाता है। आवेदन करने वाले लोगों को लाइसेंस मिल रहा है। लाइसेंस लेकर आने वाले लोगों को सरकारी अस्पताल में केंद्र खोलने की अनुमति दी जा रही है। अभी तक जिला व महिला अस्पताल के साथ रानीगंज सीएचसी में प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र खोला जा सका है।
अरविंद कुमार श्रीवास्तव, सीएमओ।