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लॉकडाउन : बैंकों में 54,000 करोड़ जमा, 96,000 करोड़ रुपये की निकासी

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54000 crore deposited in banks in lockdown withdraw of 96000 crore - फोटो : PRATAPGARH
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लॉकडाउन के दौरान जिले के बैंकों से रुपये निकालने की होड़ लगी रही। 45 दिनों में ग्राहकों ने 96,000 करोड़ रुपये निकाले हैं। हालांकि 54,000 करोड़ रुपये जमा भी हुए हैं। रुपये जमा करने में शहरी आगे रहे हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में जमा करने से कहीं ज्यादा निकासी हुई है। हालांकि बैंकों में रुपये की कोई कमी नहीं है। बीच में नगदी की समस्या होने पर आरबीआई से रुपये मंगाने पड़े थे।
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लॉकडाउन में शहर और गांव के लोगों ने बैंकों से रुपये निकालने में पूरी ताकत झोंक दी। अधिकांश ग्राहकों ने जरूरत से अधिक रुपये भी निकाले। एटीएम, ग्राहक सेवा केंद्र और बैंक की शाखाओं में लॉकडाउन के दौरान भी भीड़ लगी रही। इसकी एक वजह यह भी है कि कल्याणकारी योजनाओं की धनराशि सीधे खाते में आने पर ग्राहक रुपये लेने के लिए बैंकों में जाने को मजबूर हुए। केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से श्रमिकों को एक-एक हजार, प्रधानमंत्री जन-धन खाते में पांच-पांच सौ रुपये, उज्ज्वला गैस के लाभार्थियों को 750-750 रुपये, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत दो-दो हजार रुपये भेेजे गए। इसके साथ ही नौकरीपेशा और व्यवसाय से जुडे़ लोगों ने भी आवश्यकता से अधिक रुपये निकाले। जिले के राष्ट्रीय बैंकों से 22 मार्च के बाद सात मई तक हुई निकासी का जो आंकड़ा सामने आया है, उसके मुताबिक जिलेभर की बैंक शाखाओं से 96,000 करोड़ रुपये की निकासी हुई। जबकि 54,000 करोड़ रुपये बैंकों में भी जमा हुए हैं। हालांकि रुपये जमा करने में वृद्धि तीन मई के बाद हुई है। इसके पहले शहरों में अधिक रुपये जमा हुए, जबकि ग्रामीण इलाकों में जमा करने वालों की संख्या गिनी-चुनी रही।
दूसरे चरण में सबसे अधिक रुपये की हुई निकासी
लॉकडाउन के दूसरे चरण में रुपये की निकासी सबसे अधिक हुई है। बैंकों को एक बारगी ऐसा लगा कि वह ग्राहकों की मांग पूरी नहीं कर पाएंगे, मगर आरबीआई से चेस्ट आते ही समस्या खत्म हो गई। तीन मई के बाद दुकानों के खुलने से जमा और निकासी सामान्य हो गई है।
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लॉकडाउन में पेट्रोलपंप और गैस एजेंसी से आई रकम
लॉकडाउन में पेट्रोलपंप, गैस एजेंसी और मेडिकल स्टोर संचालकों ने ही रुपये जमा किए थे, बाकी ग्राहक रुपये निकालने वाले ही होते थे। बैंकों में जब रुपये खत्म हो जाते थे तो वह पेट्रोलपंप और गैस एजेंसी संचालकों से संपर्क कररुपये मंगाकर ग्राहकों को देते थे।
लॉकडाउन के दौरान रुपये निकालने वालों की संख्या अधिक होती थी। इसकी वजह यह थी कि कल्याणकारी योजनाओं में सब्सिडी की रकम आनलाइन ही आई। इससे ग्राहकों को रुपये बांटने में कम पड़ गए। हालांकि अब जिले में नगदी की कोई समस्या नहीं है।
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अनिल कुमार, एलडीएम
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