स्वास्थ्य विभाग में ट्रामा सेंटर में नर्सिंग अटेंडेंट और मल्टी टॉस्क वर्कर के पदों पर शासन के आदेश के बगैर ही अफसरों ने 54 कर्मचारियों को तैनाती दे दी। जिले के तीन ट्रामा सेंटरों में प्राइवेट एजेंसी के माध्यम से ठेके पर तैनात कर्मचारियों को नौ माह से मानदेय नहीं मिला है। कोरोना काल में भी इनसे काम लिया गया। मामले की जानकारी होने के बाद शासन ने सीएमओ से जवाब तलब किया है। उधर, सीएमओ का कहना है कि शासन से बजट की मांग की गई है। बजट मिलते ही उनका भुगतान कर दिया जाएगा।
जिले में करोड़ों की लागत से पूरेकेशवराय, रानीगंज और लालगंज में ट्रामा सेंटर का निर्माण हुुआ है। दो साल पहले कार्यदायी संस्था ने भवन स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कर दिए थे। पूरे केशवराय ट्रामा सेंटर में ताला लटक रहा है, जबकि रानीगंज स्थित ट्रामा सेंटर वैक्सीनेशन केंद्र बनकर रह गया है। लालगंज ट्रामा सेँटर सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक खुलता है। करीब नौ माह पहले कोरोना काल के दौरान तीनों ट्रामा सेंटर में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने प्राइवेट एजेंसी के माध्यम से 27 नर्सिंगअटेंडेंट और 27 मल्टी टॉस्क वर्करों की तैनाती की थी।
इन कर्मचारियों से कोरोनाकाल समेत नौ महीने तक काम लिया गया, लेकिन मानदेय का भुगतान नहीं किया गया। इससे कर्मचारी परेशान हैं। उन्होंने कई बार मुख्य चिकित्साधिकारी से मिलकर मानदेय की मांग की, लेकिन हर बार उन्हें टरकाया जाता रहा। सूत्रों का कहना है कि मामला संज्ञान में आने के बाद डीएम डॉ. नितिन बंसल ने सीएमओ से नाराजगी जताई और सभी कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान करने के लिए कहा। इस पर सीएमओ ने शासन को पत्र लिखा।
शासन ने मानदेय देने से इनकार करते हुए सीएमओ से ही जवाब मांग लिया है कि आखिर किसके कहने पर नर्सिंग अटेंडेंट की तैनाती की गई और उनसे क्या काम लिया जा रहा है। ट्रामा सेंटर में कितने मरीजों का इलाज किया गया है। उधर, नर्सिंग अटेंडेंट चंदन, अमन, सतीश, अभिषेक, राहुल, संदीप, प्रदीप, दीपक, शिवम, रोशन पाल आदि लोगों ने जिलाधिकारी से मानदेय दिलाने की मांग की है।
कोरोना काल में जिले में एल वन, एल टू अस्पताल का संचालन किया जा रहा था। जिसकी वजह से इन कर्मचारियों की तैनाती सेवाप्रदाता एजेंसी के माध्यम से की गई थी। इन कर्मचारियों को मानदेय दिलाने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। बजट मिलते ही मानदेय का भुगतान कर दिया जाएगा। डॉ. एके श्रीवास्तव, सीएमओ