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534.29 करोड़ रुपये खर्च, फिर भी गड्ढे बरकरार

Mon, 10 Dec 2018 12:41 AM IST
pratapgarh
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प्रतापगढ़ - फोटो : प्रतापगढ़
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 जिले की सड़कों के गड्ढे भरने के लिए 534.29 करोड़ रुपये खर्च हो गए, मगर गड्ढे अभी भी बरकरार हैं। आलम यह है कि जो सड़कें बनी थी, वह पूरी तरह उधड़ कर गड्ढे में परिवर्तित हो गई है। इससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। जनवरी से नवंबर माह के बीच जिले में 12 सौ से अधिक दुर्घटनाएं हुई हैं, इनमें 243 राहगीर घायल हुए और 220 की मौत हो चुकी है।
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लोक निर्माण विभाग में सड़कों के निर्माण में व्यापक स्तर पर खेल किया जा रहा है। नेताओं के कारिंदे सड़कों के निर्माण का ठेका लेकर खेल कर रहे हैं। बरसात के बाद जिले की सड़कों के  गड्ढे भरने का अभियान चलाया गया। लोक निर्माण विभाग खंड एक, लोक निर्माण विभाग खंड दो और प्रांतीय खंड की सड़कों को दुरुस्त कराने के लिए 534.29 करोड़ रुपये का भारी भरकम बजट दिया गया था। मगर एक माह में सड़कों की गिट्टियां उधड़ कर किनारे लग गई हैं और सड़क गड्ढे में तब्दील हो गई है। रानीगंज इलाके में उडैयाडीह -पृथ्वीगंज मार्ग के महोखरी मार्ग का निर्माण अक्तूबर माह में कराया था।


इस सड़क का निर्माण कराने के लिए 58.23 लाख रुपये मिले थे। मगर एक माह में बनी सड़क पुराने स्वरूप में आ गई है। आलम यह है कि सड़क पर काली गिट्टी ही नहीं दिखाई पड़ रही है। संडवा चंद्रिका विकास खंड के चंद्रिकनधाम से सरुवावा मार्ग का निर्माण अक्तूबर माह में कराया गया था। महज तीन किमी लंबी सड़क के निर्माण के लिए 12.14 लाख रुपये खर्च हुए थे। आलम यह है कि गिट्टियां उधड़कर पटरी पर आ गई है, सड़क गड्ढे में परिवर्तित होने के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं।
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शहर से दिलीपपुर को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण 32.56 लाख रुपये की लागत से अक्तूबर में कराया गया था, मगर सड़क पर इतने गड्ढे हो गए हो गए हैं, कि राहगीरों का चलना मुश्किल हो गया है। जिरियामऊ को जोड़ने वाली सड़क पर जगह-जगह गड्ढे होने और उसमें पानी भरा होने से आए दिन हादसे हो रहे हैं। शहर के  पुलिस लाइन के सामने नगरपालिका ने माह भर पहले सड़क तैयार किया था, मगर वह भी गड्ढे में परिवर्तित हो गई है।


ठेकेदारों की दबंगई का आलम यह है कि वह जेई और एई से सेटिंग करके घटिया सड़क का निर्माण कर रहे हैं। अधिकांश ठेकेदार ऐसे हैं, जो तारकोल से नहीं, बल्कि केमिकल से सड़क बना रहे हैं। इससे सड़क बनने के कुछ ही दिन के बाद गिट्टियां उधड़ कर पटरी पर लग जाती हैं। ठेकेदार और अफसरों के खेल में रुपये का बंदरबांट हो रहा है और गड्ढे बरकरार हैं।


जिले की सड़कों के गड्ढे अभियान चलाकर पाटे गए हैं, अगर किसी सड़क के  निर्माण में अनियमितता हुई है, तो पूरे मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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अजय वर्मा, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड
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