365 राशन की दुकानों की जांच में 3794 कार्ड मिले फर्जी
तीन माह में सिर्फ चालीस प्रतिशत राशनकार्डों का सत्यापन
राशनकार्डों के सत्यापन में कर्मचारी नहीं दिखा रहे दिलचस्पी
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। राशनकार्डों के सत्यापन में अधिकारी और कर्मचारी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। शायद यही वजह है कि तीन महीने अभी तक मात्र 365 दुकानों के राशनकार्डों का ही सत्यापन हुआ है। नगरपालिका सहित विभिन्न ब्लॉकों से मिली रिपोर्ट में अभी तक 3794 लोगों के राशनकार्ड फर्जी मिले हैं। इन लोगों को योजना से बाहर किया जा चुका है।
नेताओं के दबाव में फर्जी राशनकार्ड बनाने वाले कर्मचारियों ने सत्यापन में उन्हें बाहर करने की मुहिम चला दी है। सूबे में योगी सरकार के सत्तारुढ़ होते ही कैबिनेट मंत्री की पहल पर जिले में राशनकार्डों के सत्यापन के लिए अभियान चलाया गया। तत्कालीन प्रभारी डीएम महेंद्र बहादुर सिंह ने सत्यापन कार्य लगे कर्मचारियों को एक माह का समय दिया था। मगर तीन माह बीतने के बाद अभी तक मात्र 365 सरकारी दुकानों का ही सत्यापन हो पाया है। इन दुकानों के सत्यापन से जो खुलासा हुआ है, वह बेहद चौकाने वाला है। कर्मचारियों की जांच में 3794 राशनकार्ड फर्जी मिले हैं। मात्र चालीस प्रतिशत हुए सत्यापन में इतने राशनकार्ड फर्जी मिले हैं, तो 919 राशन की दुकानों के कार्डों का सत्यापन होना बाकी है। इससे लगता है कि यह संख्या बढ़कर करीब पंद्रह हजार पहुंच सकती है। सत्यापन की होने वाली बैठकों में सिर्फ कागजी कोरम पूरा किया जा रहा है। इससे निश्चित अवधि में सत्यापन का कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है।
आंगनबाड़ी कर रही राशनकार्ड का सत्यापन
जिले के अधिकांश गांवों में सत्यापन का कार्य आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को सौंप दिया गया है। इससे निष्पक्ष सत्यापन नहीं हो पा रहा है। सदर के भंगवा गांव सहित अनेक ग्राम पंचायतों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को सत्यापन की जिम्मेदारी दी गई है।
सत्यापन से भाग रहे हैं कर्मचारी
सत्यापन का कार्य करने से लेखपाल, शिक्षक, अनुदेशकों ने हाथ खड़ा कर दिया है। अब खंड शिक्षा अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारियों को सौंपी गई है। कर्मचारियों के जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं करने से सत्यापन प्रभावित हो रहा है।
सत्यापन का कार्य चल रहा है, अभी 365 दुकानों का सत्यापन हो चुका है। सभी बीडीओ और बीईओ को सत्यापन की जिम्मेेदारी सौंपी गई है। इसी माह के अंत तक सत्यापन का कार्य पूरा हो जाएगा। अपात्रों के स्थान पर पात्रों का चयन किया जाएगा।
मनीष विक्रम, जिलापूर्ति अधिकारी।