एमबीबीएस चिकित्सकों की डिग्री पर पैथालॉजी का संचालन नहीं हो सकेगा। इसके लिए अब एमडी पैथालॉजी होना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे जिले के चार सौ पैथालॉजी सेंटरों पर ताला लटक सकता है। सुप्रीमकोर्ट के आदेश को संज्ञान में लेकर सीएमओ ने सभी पैथालॉजी सेंटर संचालकों को नोटिस थमा दिया है। उनके रिन्यूवल पर भी रोक लगा दी है। इससे संचालकों में हड़कंप मचा है।
जिले में करीब 400 पैथालॉजी सेंटर एमबीबीएस चिकित्सकों की डिग्री पर संचालित हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बगैर एमडी के पैथालॉजी के संचालन पर रोक लगा दी है। इससे प्राइवेट पैथालॉजी संचालक परेशान हैं। कोर्ट के आदेश के बाद शासन के निर्देश पर सीएमओ ने जिले में बगैर एमडी के संचालित हो रहे पैथालॉजी संचालकों को नोटिस थमा दिया है। उनके जांच करने पर भी रोक भी लगा दी है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानी जाए तो जिले में संचालित हो रहे ज्यादातर पैथालॉजी सेंटर पर एमडी तो दूर टेक्नीशियन भी नहीं हैं। कई अप्रशिक्षित लोगों ने भी पैथालॉजी खोल रखी है। ऐसे लोग मनमानी कर सिर्फ अपनी जेब भरने में लगे हैं। मरीज की जांच के नाम पर खिलवाड़ किया जा रहा है। हालत यह है कि अलग-अलग पैथालॉजी की जांच में एक ही मर्ज की अलग-अलग रिपोर्ट आती है। इससे मरीज भी परेशान रहते हैं।
सरकारी अस्पतालों के पैथॉलाजी में भी लटक जाएगा ताला
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानी जाए तो जिले के सरकारी अस्पतालों में भी एमडी पैथॉलाजी की तैनाती नहीं की गई है। टेक्नीशियन ही मरीजों की जांच करके रिपोर्ट देते हैं। ऐसे में प्राइवेट के साथ सरकारी अस्पतालों के पैथालॉजी केंद्र भी बंद हो सकते हैं। इतना ही नहीं यदि न्यायालय के इस आदेश का स्वास्थ्य विभाग पालन करता है तो गंभीर मरीजों को जांच कराने के लिए इलाहाबाद या फिर लखनऊ के चक्कर काटने पड़ेंगे। जनपद के सरकारी अस्पतालों में बहुत सी ऐसी जांच हैं जो नहीं हो पाती है। इससे मरीज परेशान होकर प्राइवेट पैथालॉजी पर जांच कराने के लिए जाते हैं।
जितने निजी अस्पताल, उतने पैथालॉजी
जनपद में जितने निजी अस्पतालों का संचालन हो रहा है उतने ही पैथालॉजी सेंटर भी खुले हैं। एक भी सेंटर पर न तो टेक्नीशियन हैं और न ही एमडी पैथालॉजी। जबकि प्राइवेट अस्पताल में जांच के नाम पर जमकर धनउगाही की जाती है। शासन के निर्देश के बाद अब सीएमओ कार्यालय से पैथालॉजी सेंटरों का रिन्यूवल भी नहीं किया जा रहा है।
कोर्ट का जो भी आदेश आया है, उसका पालन किया जा रहा है। बगैर एमडी पैथालॉजी के एक भी सेंटर का पंजीयन नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं एक बार सभी पैथालॉजी संचालकों को नोटिस भेजकर न्यायालय के आदेश के बारे में अवगत करवा दिया जा रहा है। इसके बाद भी वह यदि पैथालॉजी सेंटर का संचालन करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टर, एचसीएल द्विवेदी, मुख्य चिकित्साधिकारी।
पोलियो की खुराक से वंचित रह गए 16 हजार नौनिहाल
स्वास्थ्य विभाग के अफसर शासन की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। शासन के आदेश के बाद भी घर-घर पहुंचकर नौनिहालों को न तो पोलियो की खुराक पिलाई जा रही है और न ही बीसीजी के टीका लगवाए जा रहे हैं। इससे नौनिहालों को खतरा बना हुआ है। जिम्मेदार अफसर अंजान बने हैं।
कोई बच्चा पोलियो की खुराक और बीसीजी टीकाकरण से वंचित न रह जाए, इसके लिए शासन लाखों रुपये पानी की तरह बहा रहा है। मगर जिले के स्वास्थ्य विभाग के अफसर शासन की मंशा पर पानी़ फेरने से बाज नहीं आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के। ही रिकार्ड के मुताबिक जिले में कुल 89066 नौनिहालों को पोलियों की खुराक पिलानी थी, मगर महज 72 478 बच्चों को ही पोलियो की खुराक पिलाई जा सकी। 16588 नौनिहाल पोलियो खुराक से वंचित रह गए।
शासन की ओर से पोलियो खुराक पिलाने के लिए स्वास्थ्य व1िभाग को जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन यहां कागजी कोरम पूरा किया जा रहा है। मजेदार बात यह है कि घर-घर पहुंचकर नौनिहालों को पोलियो की खुराक पिलाने के लिए लाखो रुपये का बजट दिया जाता है। यहीं हाल बीसीजी और मिजिल्स टीकाकरण का है। जिले में 89066 बच्चों को टीकाकरण होना था, मगर 72498 बच्चों को ही टीका लगाया गया है। अफसरों ने कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया।
सीएमओ का कहना है कि बहुत से लोग पड़ोस जनपद के हैं। उनके बच्चे प्रतापगढ़ के किसी सरकारी या फिर प्राइवेट अस्पताल में पैदा होते हैं। रिकार्ड में आ जाते हैं। मगर जब उनकी खोज की जाती है तो कुछ पता नहीं चलता है। ज्यादातर लोग ऐसे हैं जो प्रसव के बाद पत्नी व बच्चे को लेकर दूसरे शहर में चले जाते हैं। इस मामले की जांच भी कराई जा रही है।