किसान की मौत के बाद आश्रितों के पालन-पोषण के लिए मिलने वाले पांच लाख रुपये के लिए आश्रितों को अफसरों की परिक्रमा करनी पड़ रही है। जिले की पांचों तहसीलों में 1235 में से 360 आवेदनों को निरस्त कर दिया गया है। 846 आवेदन पत्रों को मंजूरी दी गई है, जिसमें 753 दावों का भुगतान किया जा चुका है। 93 का भुगतान लंबित है।
किसानों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना प्रारंभ की गई है। इसके तहत किसान की दुर्घटना में मृत्यु होने पर आश्रितों को पांच लाख रुपये मुआवजे के तौर पर मिलते हैं। विकलांगता की दशा में दो लाख रुपये का भुगतान किया जाता है।
इनसे़ट-
90 दिन के अंदर करना होता है आवेदन
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत आवेदन करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है। डीएम से अनुमति लेकर छह माह के अंदर भी आवेदन किया जा सकता है। समय से आवेदन नहीं करने पर आवेदन पत्र तहसील स्तर पर ही निरस्त कर दिए जाते हैं।
हत्या और आत्महत्या के मामले में नहीं मिलता लाभ
किसी किसान की हत्या और आत्महत्या के मामले में योजना का लाभ नहीं मिलता है। योजना का लाभ लेने के लिए पोस्टमार्टम होना आवश्यक होता है। क्योंकि इससे ही मृत्यु का कारण स्पष्ट होता है।
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत जो आवेदन आए हैं, उनकी जांच कराकर पात्र लोगों को योजना से लाभान्वित किया जा रहा है।
राकेश कुमार गुप्ता, मुख्य राजस्व अधिकारी