एक साथ व्यापार करने वाले एक व्यक्ति ने अपने ही साथी को गच्चा दे दिया। उसके दिए हुए दो अलग-अलग मिले चेक बाउंस हो गए। मामले की याचिका पीड़ित ने न्यायालय में की जिसमें सुनवाई करते हुए गुरुवार को सीजेएम ने आरोपी को 33.45 करोड़ जुर्माना व दो-दो साल की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा न करने पर तीन-तीन माह की सजा भुगतनी होगी।
कंधई थाना क्षेत्र के रतनमई निवासी लोकपति त्रिपाठी का आरोप है कि उसका अश्विन गिरिराज कुमार अग्रवाल निवासी ए 302 एकता मेडोस सिद्धार्थ नगर ठाकुर विलेज बोरीवली ईस्ट मुंबई महाराष्ट्र के साथ व्यवसायिक लेनदेन था। लेनदेन के दौरान लोकपति को अश्विन ने एक बार 30 करोड़ 50 लाख और दूसरी बार 40 लाख का चेक दिया। दोनों चेक उसने अपने बैंक एकाउंट में लगाया। कुछ दिनों बाद पता चला कि उसने जो चेक अपने खाते में लगाया है, उसके हस्ताक्षर में अंतर है और उस खाते में धनराशि भी कम है। जिसके कारण भुगतान नहीं किया जा सका। चेक बाउंस होने के बाद लोकपति अपने रुपये के लिए दोस्त के पास चक्कर लगाता रहा। टालमटोल करते साल भर से अधिक का समय व्यतीत हो गया। जिसके बाद यह मामला न्यायालय में पहुंच गया। गुरुवार को प्रकरण की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक अधिकारी अश्वनी कुमार श्रीवास्तव ने दोनों पक्षों के तर्कों व अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद फैसला सुनाया कि आरोपी को 30 करोड़ 50 लाख का चेक बाउंस होने के स्थान पर 33 करोड़ रुपये और 40 लाख के स्थान पर 45 लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया जाता है। दो-दो साल की सजा भी भुगतनी होगी। जिसमे से तीन लाख रुपये राजकोष में जमा होंगे। यदि अर्थदंड के रुपये जमा नहीं होते तो तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।