2500 मजरों तक नहीं पहुंची बिजली, जिला सौभाग्य घोषित
बजट की कमी नहीं, पर्याप्त उपकरण, फिर भी कार्यदायी संस्था बरत रही लापरवाही
एक महीने में कार्य पूरा करने का विभागीय अधिकारियों ने दिया अल्टीमेटम
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। सौभाग्य योजना के तहत 7 हजार मजरों को संतृप्त करने के दावे के बीच विद्युत विभाग ने जिले को भले ही सौभाग्यशाली घोषित कर दिया है, मगर हकीकत इससे परे है। ढाई हजार मजरे अभी भी अंधेरे में हैं। यहां न तो पोल पहुंच सके हैं और न ही तार। कार्यदायी संस्था की लापरवाही से सौभाग्य योजना अब तक साकार नहीं हो सकी है। जबकि विद्युतीकरण के लिए स्टाक के साथ पर्याप्त मात्रा में बजट भी उपलब्ध है। विभागीय अधिकारियों ने संस्था को एक महीने का समय दिया है।
जिले में अप्रैल 2018 को सौभाग्य योजना का शुभारंभ हुआ। इसके तहत बिजली से वंचित 6997 मजरों को चिह्नित किया गया। इसके लिए 389 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ। विभाग ने विद्युतीकरण की जिम्मेदारी बजाज कंपनी को सौंपी। सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बजाज कंपनी ने विद्युतीकरण कार्य शुरू किया। दिसंबर तक कार्य पूरा करने की अवधि दी गई थी। कार्यदायी संस्था ने शुरुआत में तो कार्य में तेजी दिखाई, मगर इसके बाद लापरवाही शुरू कर दी। यही कारण रहा कि 6997 मजरों के सापेक्ष अब तक महज 3000 मजरों में कार्य पूरा हो सका है। 1500 मजरों में अभी कार्य चल रहा है, जबकि 2497 मजरों में अब तक शुरू ही नहीं हो सका है। मजे की बात यह है कि अभी दो महीने पहले विद्युत विभाग ने जिले को सौभाग्यशाली घोषित कर दिया। उस दौरान कार्यदायी संस्था को जल्द कार्य पूरा करने की हिदायत दी थी। मगर दो महीने बीत जाने के बाद भी लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। जिन 1500 मजरों में कार्य प्रगति पर होने का दावा किया जा रहा है, उन मजरों में कार्य ठप पड़ा है। अब विभागीय अधिकारियों ने इस पर कड़ाई दिखाई है। कार्यदायी संस्था को 31 मार्च तक का समय दिया है। हालांकि ढाई हजार मजरों को 31 मार्च तक पूरा करना किसी चुनौती से कम नहीं। इस बारे में अधीक्षण अभियंता एसके सिंह ने बताया कि कार्यदायी संस्था को विद्युतीकरण का कार्य पूरा करने का निर्देश दिया है। यदि कार्य निश्चित समय पर पूरा नहीं हुआ तो ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई की जाएगी।
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आरकेईसी का अधूरा काम भी नहीं हुआ पूरा
पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत 2085 मजरों के विद्युतीकरण की जिम्मेदारी आरकेईसी कंपनी को मिली थी। जांच में घपलेबाजी मिलने पर आरकेईसी कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। उस दौरान 1056 मजरे ऐसे थे, जहां विद्युतीकरण नहीं हो सका था। इन मजरों के विद्युतीकरण की जिम्मेदारी बजाज कंपनी को मिली है। बात करें 1056 मजरों के सापेक्ष विद्युतीकरण तो अब तक महज 450 मजरों को ही रोशन किया जा सका है। 606 मजरे अभी भी बिजली व्यवस्था से वंचित हैं।