मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल में इलाज कराने आईं गर्भवती महिलाओं को बगैर इलाज कराए लौटना पड़ा। डॉक्टर को दिखाने के लिए मरीजों की लंबी लाइन लगी थी, दो बजते ही डॉक्टर अपने कक्ष से बाहर निकल गईं। इससे मरीजों को परेशान होना पड़ा।
अस्पताल में ओपीडी का समय सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक है। महिला अस्पताल में औसतन एक दिन की ओपीडी आठ सौ पार है। सोमवार को यह आंकड़ा एक हजार पार कर जाता है। जबकि ओपीडी में महज दो डॉक्टर बैठती हैं। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को दोपहर को ओपीडी का समय खत्म होने के बाद भी लाइन में लगे रहना पड़ता है।
सोमवार दोपहर सवा दो बजे तक ओपीडी में डॉक्टर जरीना अकेली बैठी थीं। करीब ओपीडी कक्ष के सामने 30 से अधिक मरीज खड़े थे। समय सीमा खत्म होने के कारण वे भी अपने कक्ष से बाहर निकल गईं। इससे गर्भवती महिलाओं के साथ लाइन में लगी अन्य महिला मरीजाें को परेशान होना पड़ा।
बोलीं महिला मरीज
महिला अस्पताल के ओपीडी में सुबह नौ बजे के बाद डॉक्टर आते हैं। दोपहर दो बजे निकल जाते हैं। ऐसे में लाइन में लगे मरीजों को बगैर इलाज वापस लौटना पड़ता है। - अनुराधा तिवारी, रानीगंज।
जांच कराने के बाद रिपोर्ट दिखाने के लिए करीब एक घंटे से परेशान थी। जब गेट के पास पहुंची तो डॉक्टर अपनी कुर्सी छोड़कर चली गईं। बगैर इलाज कराए वापस घर जा रही हूं। - नेहा देवी, बबुरहा राजगढ़।
वर्जन-
अप्रैल से दो नए ओपीडी कक्ष में डॉक्टर मरीजों का इलाज करेंगे। ओपीडी का समय ही दो बजे तक है, इसमें कुछ बदलाव नहीं किया जा सकता है। डाॅक्टर समय से आते हैं, मरीजों का इलाज भी करते हैं। -डॉ. रमेश पांडेय, सीएमएस महिला अस्पताल।