जिले में मेडिकल कालेज, पुल समेत अन्य सरकारी निर्माण कार्यों में लगे बाहर से आए मजदूर अब पलायन करने लगे हैं। मेडिकल कालेज के निर्माण में हैदराबाद के 225 मजदूर लगे थे। जिनके पास अब खाने का इंतजाम नहीं रह गया है। भूखों मरने की नौबत आई तो सभी घर जाने के लिए डीएम की चौखट पर दस्तक देने पहुंचे। पूरे हुड़हा में पुल बना रहे मजदूर भी सीतापुर जाने के लिए पैदल ही चल पड़े हैं। महोबा व झांसी के लोग भी अपने परिवार के साथ शहर के अलग-अलग मोहल्लों में ठहरे हुए हैं। रोजी रोटी बंद होने के बाद सभी को भोजन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
नगर कोतवाली के पूरे केशवराय में मेडिकल कालेज का निर्माण हो रहा था। हैदराबाद के शिवांस कंपनी ने ठेका ले रखा है। जिसके निर्माण में करीब 225 पुरुष व महिलाएं लगी हुई थी। लाक डाउन के बाद अब उन्हें खाने पीने की समस्या पैदा होने लगी है। अब तो कई परिवार फांका कर रहा है। कंपनी के जिम्मेदारों का मोबाइल फोन भी बंद हो गया है। ऐसी दशा में मजदूरों के सामने जीवन यापन की समस्या पैदा हो गई है। शनिवार को मजदूर जिलाधिकारी आवास आकर घर भेजने की व्यवस्था कराने की मांग करने लगे। हालांकि उनकी बात सुनने के लिए कोई भी अफसर सामने नहीं आया। जिससे निराश होकर सभी निर्माणाधीन मेडिकल कालेज लौट गए।
दूसरी ओर झांसी व महोबा के पंकज कुमार, भानु प्रताप, राघवेंद्र, शिवम, गजेंद्र, बच्चा समेत करीब 187 युवक जिले के सभी तहसीलों में अपने परिवार के साथ किराए पर रहते हैं। सभी फुल्की पानी बेचकर परिवार का गुजर बसर करते थे। लाकडाउन के बाद जीविकोपार्जन की समस्या पैदा हो गई है। इस वजह से हर कोई परेशान हो उठा है। उनका परिवार 5-6 साल से किराए पर रहता है। अब सभी परिवार को दिक्कत उठानी पड़ी रही है। ऐसे में कुछ लोग शनिवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। वह घर जाने के लिए संसाधन की व्यवस्था कराने की मांग करने लगे। हालांकि यहां भी उन सभी को निराशा ही हाथ लगी।
इसी तरह से पूरे हुड़हा में सेतु निगम का पुल बना रहे सीतापुर के मजदूरों के सामने भी समस्या आ खड़ी हुई है। ठेकेदार भी अब नहीं आ रहा है। जिससे सभी को खर्च चलाना भारी पड़ रहा है। जिससे परेशान होकर सीतापुर जनपद के मानपुर थाना क्षेत्र के बहादुरपुर के रहने वाले अजीत, लक्ष्मण, दिलीप, कौशल, सुनील समेत अन्य सदस्य घर जाने के लिए रोडवेज बस डिपो आ गए। हालांकि यहां संसाधन न मिलने के कारण सभी पैदल ही घर चल पड़े। अंबेडकर चौराहे पर खड़ी एंबुलेंस के कर्मचारियों ने सभी को फल देकर भूख मिटाने का प्रयास किया।