प्रतापगढ़। दीपावली पर किस्मत की आजमाइश हुई। रविवार रात से ही फड़ सज गई। शहर से लेकर गांव तक देर रात तक जुआ होता रहा। लाखों का का वारा-न्यारा हो गया। कहीं मोमबत्ती तो किसी जगह बिजली की रोशनी में जुए की फड़ सजी रही। हार का गम और जीत की खुशी के साथ जुआड़ी शराब के पैग में डूबते रहे। कई स्थानों पर पत्नियों के गहने भी जुआरियों ने दांव पर लगा दिए
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धनतेरस से ही फड़ लगने शुरू हो गए थे। साधारण से लेकर धनवान व्यक्तियों ने हिस्सा लिया। बुधवार की रात जुआ खूब खेला गया। शहर के कई हिस्सों में जुआरियों का मजमा देखने को मिला। रामलीला मैदान, महुली, जोगापुर, अचलपुर, चिलबिला जंगल, शहर के दो होटल और कुछ लाज में भी जुआरियों की फड़ सजी रही। ग्रामीण क्षेत्रों में भी यही हाल रहा। तमाम लोग खेत के बीच में मोमबत्ती की रोशनी में जुआ खेलते रहे। कई बाहुबलियों के घरों में भी जुए की फड़ बैठी। फड़ पर जुआरी सारी रात ताश के पत्तों पर नोटों की वर्षा करते रहे। हारने वालों को फड़ पर पैसे की कमी नहीं रही। जुआ खेलने वालों को तत्काल कर्ज पर पैसा देने वाले भी मौजूद रहे। हारे हुए जुआरी के मुंह खोलते ही वह जुआ खेलने के लिए धन मुहैया कराए। जीतते ही उधारी की रकम वापस लेने का क्रम भी जारी रहा। कर्ज की रकम को भी हारने वालों ने एक दो दिन में पैसा चुकता करने का भरोसा दिया। जुआ हारने का गम और जीत की खुशी का इजहार दारू के पैग से हुआ। हर पकड़ के बाद जाम छलकते रहे। फड़ पर बैठे कुछ जुआरियों की मानें तो बीवी के गहने भी दांव पर लगाए गए। चर्चाओं पर यकीन करें तो शहर से लेकर गांव में हुए जुए पर दो-तीन करोड़ से अधिक का दांव लगा है।