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बेसिक शिक्षा विभाग में घट गए 21 हजार बच्चे

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बेसिक शिक्षा विभाग में घट गए 21 हजार बच्चे
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खाना-पीना, कॉपी-किताब, जूता-मोजा, यूनीफार्म सब कुछ फ्री, फिर भी घट रही संख्या
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। खाना-पीना, किताब-कॉपी, जूता-मोजा, यूनीफार्म सब कुछ फ्री होने के बाद भी जिले के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में बच्चों की संख्या तेजी से घट रही है। पिछले शिक्षासत्र के मुकाबले इस बार बच्चों की संख्या 9.5 प्रतिशत घट गई है। पिछले वर्ष प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में बच्चों की जो संख्या 2,40,090 थी, वह इस बार घटकर 2,19,261 पर पहुंच गई है। बीते शिक्षासत्र के अनुपात में इस वर्ष 20,829 बच्चों की संख्या में कमी आई है।
बेसिक शिक्षा विभाग के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में बच्चों की संख्या घटने से अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने बीएसए के साथ ही खंड शिक्षा अधिकारियों पर नकेल कसने के साथ ही बच्चों की संख्या बढ़ाने को कहा है। विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो वर्ष 2018-19 में कुल 2,40,090 बच्चे थे। जबकि वर्ष 2019-20 में बच्चों की संख्या घटकर 2,19,261 हो गई है। पिछले वर्ष के अनुपात में 20,829 बच्चे कम हैं। यानि कुल 9.5 प्रतिशत बच्चे कम हो गए हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की नाक इंग्लिश मिडियम स्कूलों ने ही बचा रखी है। अगर विभाग ने इंग्लिश मिडियम स्कूलों का संचालन प्रारंभ न किया होता तो आज बेसिक शिक्षा की दशा और खराब होती।
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बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों का जो मानक है, जिले में उससे अधिक शिक्षकों की तैनाती की गई है। विभाग का मानना है कि 30 बच्चों पर एक शिक्षक की तैनाती होनी चाहिए। जिले में 2,19,261 बच्चों के सापेक्ष 7308 शिक्षकों की आवश्यकता है। जबकि जिले में शिक्षक और शिक्षामित्रों को मिलाकर 8606 अध्यापक तैनात हैं। इस प्रकार 1298 शिक्षक अधिक हैं। अध्यापकों की इस गणना में 438 अनुदेशकों को शामिल नहीं किया गया है, जो मिडिल स्कूलों में तैनात हैं। अभी इनका नवीनीकरण नहीं हुआ है।
मिडिल स्कूल कुशफरा में एक बच्चे को पढ़ा रहे दो अध्यापक
प्रतापगढ़। जिले के पूर्व माध्यमिक स्कूल कुशफरा में एकमात्र बच्चा है। इस स्कूल में वर्तमान में दो शिक्षकों की तैनाती है।
यह स्कूल 9 जुलाई को उस समय सुर्खियों में आया था जब डीएम के निरीक्षण में यहां कमरों में भूसा भरा मिला था। डीएम के निर्देश पर एनपीआरसी मनोज रावत, हेडमास्टर रमेशदत्त, सहायक अध्यापिका अनामिका श्रीवास्तव, रीना शुक्ला को निलंबित कर दिया गया था। स्कूल में पठन-पाठन प्रारंभ करने के लिए दो नए अध्यापकों की तैनाती की गई है। नवीन तैनाती पाने वाले यह शिक्षक अब बच्चों को खोजने के लिए निकल रहे हैं, मगर बच्चे नहीं मिल रहे हैं। दरअसल, यह स्कूल शनिदेवधाम में बकुलाही नदी के तट पर स्थित है। आसपास गांव नहीं होने के कारण बच्चों को दूर से आना पड़ता है। बरसात के दिनों में नदी के उफान को देखकर अभिभावक इस स्कूल में बच्चे भेजने को तैयार ही नहीं हैं। पूर्व में तैनात रहे रमेश दत्त, अनामिका और रीना शुक्ला का निकट में घर था, इसलिए स्कूल में तैनाती करवा रखी थी। कागज में बच्चों का फर्जी आंकड़ा भेजकर एमडीएम, ड्रेस और स्वेटर बांटने की धनराशि हजम कर जाते थे। नए अध्यापकों की तैनाती के बाद सच्चाई सामने आने पर बीएसए हतप्रभ हैं।
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बीएसए अशोक कुमार सिंह का कहना है कि जिले के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में बच्चों की संख्या घटी नहीं है। 20,829 बच्चे ऐसे हैं जो कक्षा आठ पास करके इंटर कॉलेजों में पढ़ने के लिए गए हैं। इन स्कूलों में बच्चों का रजिस्ट्रेशन हो रहा है, शहर से गांव तक स्कूल चलो अभियान की रैली निकाली जा रही है। बच्चों की वास्तविक संख्या 30 सितंबर को आएगी। अफसरों की ओर से भी बच्चों की संख्या बढ़ाना का आदेश आया है।
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