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जाते-जाते बच्चों को सता रही सर्दी

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जाते-जाते बच्चों को सता रही सर्दी
नौनिहालों पर मौसम का अटैक, बुखार-डायरिया और जकड़न से हो रहे पीड़ित
जिला अस्पताल में 50 बच्चे भर्ती, ढाई सौ से अधिक का ओपीडी में इलाज हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जाते-जाते सर्दी बच्चों पर सितम ढा रही है। दिन में गर्मी और रात में ठंड के चलते बच्चों की हालत खराब है। बुखार, जकड़न और डायरिया आदि ने उन्हें परेशान कर रखा है। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है। बुखार से शरीर टूट रहा है। उल्टी-दस्त से भी हालत खराब है। 24 घंटे के भीतर जिला अस्पताल में करीब पचास बच्चों को भर्ती कराया गया। ढाई सौ से अधिक बच्चों का ओपीडी में इलाज हुआ।
जिले में मंगलवार को न्यूनतम पारा 14 तो अधिकतम 26.5 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम के साथ ही पारे में भी उतार-चढ़ाव लगा है। मार्च में जितनी गर्मी पड़नी चाहिए, अभी उतनी गर्मी नहीं पड़ रही है। जिसका असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। मंगलवार को जिला अस्पताल में जा रही सर्दी बच्चों के लिए मुसीबत नजर आई। ओपीडी में बालरोग विशेषज्ञ मोहित शुक्ला और अनिल गुप्ता ने तकरीबन 250 बच्चों का उपचार किया। बुखार, उल्टी दस्त और जकड़ने से पीड़ित 50 बच्चों को अस्पताल में दाखिल कराया। सचौली के अबु गुरैरा, मोहम्मद हसन कोठियाही दिलीपपुर, अयान साल्हीपुर कंजास, कशिश सरायवीरभद्र, फरहान निवासी दोहरी तकिया, शिफा निवासी पूरे माधव सिंह, तारिक रामपुर जरियारी, अरचित निवासी पठखौली बुखार व डायरिया से पीड़ित हैं। ओपीडी बंद होने के बाद भी जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बच्चों को लेकर परिजन पहुंचते रहे। चिकित्सक बच्चों के बीमार होने का कारण मौसम में बदलाव बता रहे हैं। इनका कहना है कि मौसम में बदलाव का असर पड़ता है। जरा सी भी लापरवाही बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रही है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ अनिल गुप्ता की मानें तो मौसम में बदलाव के प्रभाव से बच्चों को बचाने की जरूरत है।
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इनसेट-------
सावधानी
0 बच्चों को गर्म कपड़े पहनाकर रखें
0 गर्मी लगने पर पंखा न चलाएं
0 ठंडा पानी पीने के लिए न दें
0 बच्चों को पानी उबालने के बाद ठंडा करके पीने दें
0 नवजातों को दिन में भी पूरी तरह ढककर रखें
0 मच्छरदानी का इस्तेमाल किया जाए
0 बच्चों के बीमारी होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें
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बोतल से दूध पिलाना भी खतरनाक
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ मोहित शुक्ला का कहना है कि बच्चों को बोतल से दूध पिलाना खतरनाक है। मां के दूध का सेवन कराएं। यदि मां का दूध नहीं होता तो बच्चों को बोतल के बजाए चम्मच से दूध पिलाएं। बोतल से दूध पीने वाले बच्चे डायरिया की चपेट में आते हैं। इनका पेट भी अक्सर खराब रहता है।
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झोलाछाप डाक्टरों की क्लीनिक पर भी मरीजों का भरमार
लगातार मौसम में बदलाव के चलते बच्चे बीमारी की गिरफ्त में आ रहे हैं। ग्रामीण अंचल में बीमारी की चपेट में आने वाले बच्चों को लेकर परिजन झोलाछाप डाक्टरों की शरण में पहुंच रहे हैं। कभी-कभी उनकी दवाएं बेअसर हो जाती हैं। इसके चलते लोगों को बच्चों के उपचार के लिए प्रयागराज या लखनऊ तक जाना पड़ता है।
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