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ट्राई के नियम ताक पर, केबिल उपभोक्ताओं से मनमाना रिचार्ज करा रहे आपरेटर

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ट्राई के नियम ताक पर, केबिल उपभोक्ताओं से मनमाना रिचार्ज करा रहे आपरेटर
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टैक्ट सहित 154 रुपये में उपलब्ध कराने हैं एयर फ्री के सौ चैनल
टीवी देखने के लिए उपभोक्ताओं से कराया जा रहा चार से पांच सौ का पैकेज
फैला रहे भ्रम, बिना पैकेज लिए एक भी चैनल नहीं देख सकेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। शहर के केबिल आपरेटर ट्राई के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। ट्राई ने स्पष्ट आदेश दिया है कि केबिल उपभोक्ता टैक्स समेत 154 रुपये में सौ एयर फ्री चैनल देख सकेंगे, लेकिन आपरेटर मनमानी पर उतारू हैं। केबिल टीवी उपभोक्ताओं से चार से पांच सौ रुपये महीने के पैकेज की बात की जा रही है। भ्रम फैलाया जा रहा है कि पैकेज लिए बिना एयर फ्री चैनल भी नहीं देख सकेंगे। इससे उपभोक्ता परेशान हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं की जेब ढीली हो रही है।
दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने केबिल और ब्राडकास्ट इंडस्ट्री के लिए नियम जारी किए हैं। इस नियम के मुताबिक लोगों को उतना ही पैसा खर्च करना होगा जितने चैनल वह देखना चाहते हैं। ट्राई ने कहा कि है केबिल आपरेटर और डीटीएच कंपनी को 100 फ्री टू एयर चैनल 130 रुपये में देने होंगे। जिस पर जीएसटी लगने से हर महीने 154 रुपये शुल्क उपभोक्ताओं को देना होगा। इन फ्री टू एयर चैनलों के अलावा अगर आप कुछ और चैनल देखना चाहते हैं तो आपको उतने ही चैनल का भुगतान करना होगा। ट्राई ने निर्देश दिया है कि नियम की अनदेखी करने वाले केबिल आपरेटर्स और डीटीएच प्रोवाइडर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद केबिल आपरेटर खुलेआम ट्राई के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। उपभोक्ताओं के बीच में चैनल का पैकेज न कराने पर सभी चैनल बंद हो जाने का भ्रम फैलाया जा रहा है। ऐसे में मजबूर उपभोक्ताओं को चैनल के नाम पर ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं।
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इनसेट-
मनपसंद चैनल देखने के लिए देने पड़ सकते हैं 400 रुपये
टीवी पर मनपसंद चैनल देखने के लिए लगभग हर महीने 400 रुपये तक शुल्क अदा करना पड़ सकता है। कपूर चौराहा स्थित केबिल आपरेटर संचालक का कहना है कि 130 रुपये फ्री एयर चैनल के लिए देने होंगे। इसके अलावा पसंदीदा चैनल देखने के लिए उसका पैकेज कराना होगा। 25 चैनल पर 20 रुपये एनसीएफ के साथ पूरे शुल्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी देना होगा। इस तरह अगर दो से तीन चैनल का पैकेज उपभोक्ता लेता है तो उसे करीब 400 रुपये तक केबिल आपरेटर को देना पड़ेगा। जबकि पूर्व में उपभोक्ताओं को सभी चैनल पर केवल 180 रुपये देना पड़ता था। ऐसे में मनपसंद चैनल देखने के लिए उपभोक्ताओं को जेब ढीली करनी पड़ेगी।
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वर्जन
मनोजरंजन विभाग को वाणिज्य कर विभाग में शामिल कर दिया गया है। केबिल आपरेटर्स और डीटीएच प्रोवाइडर की जांच का अधिकार समाप्त कर दिया गया है। नई गाइडलाइन आने के बाद ही जांच की जा सकेगी।
रोशनलाल, वाणिज्य कर अधिकारी।
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