प्रतापगढ़। शासन ने प्रतापगढ़ बस स्टैंड को मॉडल बस डिपो का दर्जा दिया है। हालांकि यहां वर्कशाप की व्यवस्था आज तक नहीं की जा सकी है। ऐसे में समय से बसों की मरम्मत नहीं की जा पा रही है। इससे हादसे का खतरा बना ही रहता है। साथ ही साफ सफाई के अभाव में यात्रियों को गंदी बसों में सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है। े
शासन ने तीन वर्ष पहले प्रतापगढ़ बस स्टैंड को मॉडल डिपो का दर्ज दिया। निर्माण के लिए 22 करोड़ों रुपये भी कार्यदायी संस्था को रिलीज कर दिए गए। मगर अब तक वर्कशाप के लिए विभाग के अफसर जमीन नहीं खोज सके। ऐसे में जुगाड़ पर रोडवेज बसों को मरम्मत करके चलाया जा रहा है। इससे किसी दिन बड़ा हादसा भी हो सकता है। वर्कशाप न होने के चलते बसों की मरम्मत समय से नहीं हो पा रही है। दिनोंदिन बसें खटारा होती जा रही हैं। सफर करते समय हर वक्त यात्रियों की जान जोखिम में रहती है। दूसरी ओर वर्कशाप की व्यवस्था न होने के कारण बसों की धुलाई और सफाई तक नहीं हो पा रही है। इसे लेकर विभाग के अफसर चुप्पी साधे हुए हैं। पूर्व एआरएम रवींद्र सिंह ने कई स्थानों पर जमीन देखी थी, मगर उच्चाधिकारियों को स्थान पसंद नहीं आया। वर्तमान एआरएम भी कई स्थान पर वर्कशाप बनाने के लिए भूमि की तलाश करने गए, लेकिन व्यवस्था नहीं बन सकी। मॉडल डिपो में वर्कशाप की व्यवस्था न होने के कारण ज्यादातर बसें मरम्मत के अभाव में खड़ी रहती हैं। इससे यात्रियों को परेशान होना पड़ता है। डिपो में तैनात कुछ मैकेनिक बसो में आने वाली खामियों को तो किसी तरह दूर कर देते हैं, मगर बड़ी दिक्कतें आने के बाद वे भी हाथ खड़े कर देते हैं। ऐसे में बसें खराब हो जाती हैं। सीएम से लेकर पीएम तक स्वच्छता अभियान चला रहे हैं, मगर यहां रोडवेज बसों की धुलाई तक नहीं की जा रही है। गंदीं बसों से मजबूरन यात्रियों को सफर करना पड़ता है। जिम्मेदर अफसरों का इस ओर ध्यान तक नहीं पड़ता है।
परिवहन मंत्री ने बसों से खुले तार हटवाकर तत्काल वायरिंग करवाने को एआरएम को निर्देश दिया था, मगर बेल्हा में कुछ नहीं हुआ। वर्कशाप की व्यवस्था न होने के कारण पुरानी और खटारा बसों में आज भी तारों का मकड़जाल दिखाई पड़ता है। चालक के पास तार बिखरे रहते हैं। बैटरी खुले में रखी गई है। प्रतापगढ़ डिपो की बस खराब हो जाती है तो उसे मरम्मत के लिए लालगंज वर्कशाप या फिर इलाहाबाद भेज दिया जाता है। यहां से बनकर आने के बाद ही रोड पर निकाला जाता है। वर्कशाप के चलत कुछ दिनों तक लालगंज सभी बसों को भेजा जाता था। वहीं पर मरम्मत होती थी। इनकम कम होने पर विभाग ने लालगंज वर्कशाप में बसों को भेजना ही बंद कर दिया। स्टेशन मास्टर मॉडल डिपो प्रतापगढ़ कंचन सिंह का कहना है कि वर्कशाप की व्यवस्था न होने से मरम्मत में दिक्कतें आती हैं। बहुत ज्यादा गड़बड़ी आने के बाद बनने के लिए बसों को इलाहाबाद भेज दिया जाता है। जमीन की खोज की जा रही है।