प्रतापगढ़। मांगों को लेकर रोजगार सेवक मंगलवार को सड़क पर उतरे। विकास भवन से पैदल ही जिलाधिकारी आवास की ओर कूंच कर दिया। अंबेडकर चौराहे पर जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी डीएम आवास की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस के होश उड़ गए। पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को रोक लिया। बाद में एसडीएम सदर को अपना ज्ञापन सौंपा। चेताया कि यदि उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता तो वे लोग उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।
मनरेगा के तहत गांवों में तैनात रोजगार सेवक अपनी नौ सूत्रीय मांगों को लेकर मंगलवार को सड़क पर उतरे। विकास भवन से नारेबाजी करते हुए सभी रोजगार सेवक कचहरी की ओर चल पड़े। रोजगार सेवकों के प्रदर्शन को देखते हुए कोतवाली पुलिस मुस्तैद रही। अंबेडकर चौराहे पर पहुंचे रोजगार का सेवकों का साथ देेने के लिए तकनीकि सहायक समेत दूसरे राज्यकर्मचारी भी पहुंच गए। मांगों को लेकर ज्ञापन देेने के लिए रोजगार सेवक जिलाधिकारी आवास की ओर बढ़ने लगे। यह देख पुलिस के हाथ पैर फूल गए। डीएम आवास की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोक लिया। वे नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ने का प्रयास करते रहे। रोजगार सेवकों ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार उनकी आवाज को दबाना चाहती है। काफी दिनों से वे लोग गांवों में काम कर रहे हैं। अब उनकी रोजी रोटी छीनने का प्रयास किया जा रहा है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अपने हक के लिए वे संघर्ष का रास्ता अपनाएंगे। इस मौके पर प्रदर्शनकारियों को अपना समर्थन देते हुए राज्य कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों ने उनके आंदोलन में सहयोग का वादा किया। उपजिलाधिकारी सदर का नौ सृत्रीय ज्ञापन सौंपा। प्रशासन को चेताया कि यदि उन लोगों की मांगों को पूरा नहीं किया जाता तो वे लोग उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।
शहर के अंबेडकर चौराहे पर प्रदर्शनकारियोें की भीड़ से जाम लग गया। जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होने लगी। पुलिस ने सभी को चौराहे से हटाकर यातायात बहाल कराया। काफी देर तक चौराहे पर अफरा-तफरी का माहौल कायम रहा। डीएम आवास की ओर बढ़ रहे रोजगार सेवकों को पुलिस ने रास्ते में रोक लिया। सभी की बातों को सुनने के लिए प्रभारी कोतवाल ने एसडीएम सदर को मौके पर बुलाया। एसडीएम सदर भी तहसील दिवस छोड़कर प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। रोजगार सेवकों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को पूरा करने के लिए शासन को पत्र भेजा जाएगा। ज्ञापन देने के बाद रोजगार सेवक पुलिस जिंदाबार के नारे लगाने लगे।