प्रतापगढ़। चार-पांच दिनों से मौसम का मिजाज बदल गया है। धूप व बढ़ते तापमान से गेहूं की फसल पर संकट मंडरा रहा है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक ठंड देर से शुरू होकर जल्द खत्म हो रही है। मौसम का रुख यदि ऐसे ही रहा और बारिश न हुई तो पैदावार पर असर पड़ेगा। करीब 35 प्रतिशत पैदावार घट सकती है।
गेहूं की बुवाई के लिए 15 नंबर तक का समय उपर्युक्त माना जाता है। इस समयावधि में बुवाई करने से पैदावार अच्छी होती है। इसे ध्यान में रखकर जिलेभर के अधिकांश किसानों ने बुवाई की थी। नवंबर में बुवाई के बाद दिसंबर के अंतिम चरण तक पारा चढ़ा रहा। रविवार को अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम 7.0 तक रहा। इससे गेहूं की फसल पर विपरीत असर पड़ा। जनवरी में ठंड की शुरुआत हुई। शीतलहर और कड़ाके की ठंड गेहूं के लिए फायदेमंद थी। माना जा रहा था कि मध्य फरवरी तक ऐसी ही स्थिति रहेगी, लेकिन 15 दिन में ठंड के तेवर में फिलहाल कमी आने लगी है। मकर संक्रांति के बाद मौसम का मिजाज बदल गया और धूप खिलने लगी।
अधिकतम तापमान में भी वृद्धि होने लगी। रविवार को अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। जिला कृषि अधिकारी अश्वनी कुमार ने बताया कि बढ़ता तापमान गेहूं की फसल के लिए नुकसानदायक है। इससे पैदावार प्रभावित होगा। बारिश जरूरी है। फरवरी व मार्च में कम से कम तीन बार हल्की बारिश हो, तभी गेहूूं के पौधों का विकास हो सकेगा।