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ईद के लिए सजा बाजार, डिजाइनर बुर्कों की भरमार

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23 मई 2019
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मुकद्दस रमजान
सत्रहवां रोजा इफ्तार
सुन्नी 6.48
शिया 6.52
अठ्रहवां रोजा सहरी
सुन्नी 3.33
शिया 3.28

फोटो-
ईद के लिए सजा बाजार, डिजाइनर बुर्कों की भरमार
मुंबई के नकाब को दी जा रही प्राथमिकता
देर रात तक खुल रहा बाजार, खरीदारों की आमद से बाजारों में रौनक
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। मुकद्दस रमजान का महीना पाकीजगी के साथ मनाया जा रहा है। जैसे- जैसे ईद का दिन करीब आ रहा है, वैसे-वैसे बाजारों की रौनक बढ़ती जा रही है। कपड़ों के साथ ही महिलाएं डिजाइनर बुर्कें खरीद रहीं हैं। बाजार में खरीदारों की भीड़ देखने के बाद दुकानदार भी उत्साहित हैं।
शहर के पंजाबी मार्केट, फलमंडी, बाबागंज, शापिंग माल समेत ग्रामीण अंचल की बाजारों में ईद की खुशियां मनाने के लिए कपड़ों के साथ जूता चप्पल व बुर्कों की बाजार सज गई है। लोग बाजारों खरीदारी करने पहुंच रहे हैं। मुंबई का सऊदी निदा कपड़े के बुर्के को सबसे अधिक पसंद किया जा रहा है। गले और आस्तीन पर लेस लगाकर अंब्रेला स्टाइल में इसे बनाया गया है। इसके अलावा मर्जीना कट बुर्का भी खास है। इसमें आस्तीन कफ की बनी होती है और नग लगे हैं। दोनों ही डिजाइन महिलाओं को खासी पसंद हैं। यह 1800 से दो हजार रुपये के हैं। काफ्तान बुर्का मुंबई की डिजाइन है, जबकि दुबई से बटरफ्लाई स्टाइल वाला बुर्का है। सफेद और काले रंग के जार्जेट कपड़े का बना हुआ है। इसकी कीमत 35 सौ रुपये हैं। सूट में ट्राउजर और फ्लैपर को पसंद किया जा रहा है। बुर्का दुकानदार मोहम्मद शमीम ने बताया कि सबसे अधिक काला रंग का बुर्का पसंद किया जा रहा है। नियमित पहनने के लिए कप्तान बुर्का भी पसंद किया जा रहा है। पाइपिक के डिजाइन वाला यह बुर्का है, जिसकी आस्तीन परत में जुड़ी हुई होती है।
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इनसेट-----
रमजान का हर लम्हा इबादत में गुजार रहे रोजेदार
प्रतापगढ़। मुकद्दस रमजान में इबादत का दूसरा अशरा चल रहा है। माह ए रमजान का दूसरा अशरा चल रहा है। पंद्रह रोजा बीत चुका है लेकिन रोजेदारों में खुदा की इबादत का जोश और जज्बा अभी भी बरकरार है। फज्र से शुरू होने वाला इबादत का दौर नमाज ए तरावीह तक कायम है। रोजेदारों का मस्जिदों में सात से दस दिनों की नमाज ए तरावीह में जुटना जारी है। इबादत से लबरेज माह ए रमजान का एक-एक दिन कम होने लगा है। अजमत के इस महीने में फज्र की अजान के साथ खुदा की इबादत का दौर शुरू हो जाता है। जो नमाज ए तरावीह तक चलता है। वहीं रात के वक्त भी घरों में रोजेदार कुरान ए पाक की तिलावत करना नहीं भूलते। बच्चों का सुबह शाम मस्जिदों में आना जाना लगा है। चांद रात से शुरू तरावीह की नमाज कई मस्जिदों में अब खत्म हो चुकी है। छोटे बच्चे भी खुदा की इबादत में रोजा रख रहे हैं। नमाजों में बड़ों के साथ वह भी शिरकत कर रहे हैं। रमजान के बाकी दिनों को कसरत के साथ गुजारने के लिए रोजेदार अपना अधिकांश समय इबादत में व्यतीत कर रहे हैं। मगरिफरत के लिए लोग खुदा की बारगाह में हाथ फैलाकर नम आंखों से दुआ मांग रहे हैं।
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