प्रतापगढ़। स्वास्थ्य विभाग के लापरवाह कर्मचारियों और अफसर सरकारी अस्पताल में जन्म लेने वाले नवजातों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। जन्म के तत्काल बाद बच्चे के ब्लड ग्रुप की जांच करने के लिए शासन ने निर्देश दिया है। जच्चा और बच्चा के ब्लड ग्रुप मैच न करने पर तत्काल एटीडी का इंजेक्शन लगाया जाना है। मगर सीएचसी पीएचसी और एएनएम सेंटर तो दूर जिला महिला अस्पताल में भी जन्म लेने वाले नवजातों के ब्लड ग्रुप की तत्काल जांच नहीं की जा रही है।
प्रसव के बाद जच्चा और बच्चा के ब्लड ग्रुप की जांच कराई जाती है। जांच में अंतर आने पर तत्काल मां को एटीडी का इंजेक्शन लगाया जाता है। इस इंजेक्शन से मां और बच्चे में इंफेक्शन होने का खतरा नहीं रहता है। इतना ही नहीं दूसरे प्रसव के दौरान प्रसूता को किसी भी प्रकार की दिक्कतें नहीं होती है। जिला महिला अस्पताल की डॉक्टर रीना प्रसाद का कहना है कि 24 घंटे के अंदर इंजेक्शन न लगने से मां और बच्चे में इंफेक्शन का खतरा बना रहता है। साथ ही जब महिला को दूसरा प्रसव होना होता है तब जच्चा और बच्चा की जान बचा पाना मुश्किल हो जाता है। इसके चलते इस इंजेक्शन को लगवाने के लिए शासन की ओर से निर्देश दिया गया है। हालांकि एएनएम सेंटर और पीएचसी तो दूर सीएचसी में भी एटीडी इंजेक्शन नहीं मिलता है। इसके चलते लोगों को जिला महिला अस्पताल आना पड़ता है।
जिला महिला अस्पताल में भी दोपहर एक बजे के बाद जन्म लेने वाले बच्चों के ब्लड की जांच नहीं हो पाती है। दरअसल इस समय पैथालाजी बंद हो जाती है। ऐसे में उन्हें इंजेक्शन भी नहीं लग पाता। वहीं सीएमएस जिला महिला अस्पताल संतोष त्रिपाठी का कहना है कि पैथालाजी बंद होने से दिक्कतें आ रही हैं। हालांकि सुबह होते ही पहले नवजात बच्चों के ब्लड जांच कर ग्रुप बताने के लिए लैब टेक्निशियन से कहा गया है। यदि वे ऐसा नहीं कर रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।