कर्जमाफी का लाभ उठाने से जिले के 14,127 किसान वंचित रह गए हैं। इन किसानों के पास आधार कार्ड ही नहीं थे और जब उनके हाथ में आधार कार्ड आया, तब तक समय सीमा बीत चुकी थी। हालांकि अभी 4012 किसानों की आपित्तयां विचाराधीन हैं। मगर इन किसानों को अपनी चूक के लिए हाथ मलना पड़ रहा है।
मोदी सरकार ने किसानों का कर्ज माफ करने का जो अभियान चलाया, उसमें जिले के 51,884 किसानों का 220.5 करोड़ रुपये माफ हो गए, मगर जिले के 14,127 किसानों का कर्ज अभी तक नहीं माफ हुआ है, और न ही किसी प्रक्रिया में शामिल हुए हैं। यह किसान कर्जमाफी के दायरे में तो आ रहे थे, मगर इन किसानों के पास आधार कार्ड ही नहीं था। इसलिए कर्जमाफी के दायरे में नहीं आए। इन किसानों के हाथ में जब आधार कार्ड आया, तो ऑनलाइन आवेदन करने की समय सीमा समाप्त हो गई थी। कर्जमाफी से वंचित यह किसान अब हाथ मल रहे हैं, फिलहाल 4,012 किसान ऐसे हैं, जिनके आवेदनों का अभी तक निस्तारण नहीं किया गया है। दरअसल, कर्जमाफी को लेकर अधिकारी अब सुस्त हो गए हैं, पहले जो तेजी दिखाते थे, वह अब नहीं रह गई है। ऐसे में बेचारे किसान भी कभी बैंक और कभी अफसरों की परिक्रमा कर रहे हैं।
465 खातों में नहीं दर्ज है नामिनी
जिले के 465 किसान ऐसे हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है और वह मानक के दायरे में आ रहे हैं, मगर उनकी मौत के बाद उनके पुत्रों का नाम नहीं आने से कर्जमाफी से वंचित रह गए हैं। पिता की मौत के बाद अगर पुत्रों का नाम बैंक में जुटा होता, तो इन किसानों का भी कर्ज माफ हो जाता।
जिन किसानों को आधार कार्ड मिल रहा है, वह अविलंब बैंक पहुंचकर खाते से लिंक कराएं और जिस खाते में अभी नामिनी नहीं है, उसे भी अंकित करा दें, जिससे आवेदन मांगने पर फौरन किसान का चयन हो सकें।
डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी।