बाबा बेलखरनाथ धाम स्थित सई नदी में दुर्घटना बाहुल क्षेत्र। संवाद
जिले में नदी, तालाब व पोखरे में डूबने से 26 माह में 133 लोगों ने जान गंवाई हैं। सबसे अधिक मौतें कुंडा, लालगंज तहसील में हुई हैं। इस साल एक अप्रैल से चार जून तक 13 लोगों की मौत पानी में डूबने से हुई है। इसमें आठ बच्चे शामिल हैं।
विभागीय अफसरों के अनुसार, लोगों में जागरूकता का अभाव व नदी, पोखरे व तालाबों से जुड़े दुर्घटना बहुल स्थानों पर चेतावनी बोर्ड नहीं होने से हादसों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। बताया गया कि बारिश में साल-दर-साल यह ग्राफ बढ़ता है। इसपर लगाम जरूरी है।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार 2024 में डूबने से 57 लोगों की मौत हुई थी। वहीं, 2025 में यह संख्या 63 पहुंच गई। इसमें 21 बच्चे शामिल थे।
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नदियों व तालाबों के किनारे नहीं लगे चेतावनी बोर्ड
शासन ने गंगा, सई नदी के नाविकों को चिह्नित कर लाइफ जैकेट समेत अन्य उपकरण दिए हैं लेकिन दुर्घटना बहुल स्थानों पर चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए हैं। अमृत सरोवरों व पोखरों के किनारे भी चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए हैं।
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जागरूकता से होगा बचाव
जिला आपदा विशेषज्ञ अनुपम शेखर तिवारी ने बताया कि लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। साथ ही अभिभावक बच्चों को तालाब, नदी व पोखरों के पास न जाने दें। छोटे बच्चों को दोपहर में अकेले घर से बाहर नहीं जाने दें।
वर्जन:-
जिले में डूबने से हो रही मौतों को कम करने के लिए मानिकपुर व कुंडा स्थित गंगा नदी व सई नदी के तटों के किनारे चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे। साथ ही ग्राम पंचायत स्तर पर बने अमृत सरोवरों व तालाबों के किनारे भी दुर्घटना बहुल स्थलों को चिह्नित किया जाएगा। - आदित्य प्रजापति, एडीएम