जिला ओडीएफ घोषित, फिर भी नहीं सुधरी गांवों की दशा
536 गांवों में डंप है करोड़ों रुपये, जांच में जुटे अफसर
30 नवंबर को ओडीएफ घोषित हो चुका है जिला, तीन माह में कमियों को पूरा करने का मिला मौका
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। बेल्हा ओडीएफ घोषित होने के बाद भी शौचालयों की दशा नहीं सुधरी है। कुंडा, बाबागंज और बिहार विकास खंडों के अधिकांश ग्राम पंचायतों में शौचालय के रुपये डकारने वाले प्रधानों पर कार्रवाई की तैयारी हो रही है। अभी तक विभाग को 536 गांवों में शौचालय के रुपये को डंप करने की रिपोर्ट मिली है। हालांकि ऐेसे प्रधानों को रुपये का सदुपयोग करने के लिए दो सप्ताह का मौका दिया गया है।
जिले को ओडीएफ घोषित करने में 526.31 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। जिले के 3.94 लाख परिवारों को शौचालय बनाने के लिए दी गई इस धनराशि का कागज पर तो उपभोग कर लिया गया है, मगर वास्तव में अधिकांश ग्राम पंचायतों में धनराशि अभी भी डंप है। 30 नवंबर को जिला ओडीएफ घोषित होने के बाद से विभागीय अधिकारियों ने शौचालय निर्माण कम बल्कि गांव-गांव में इस बात की तहकीकात करने में लगे हुए हैं कि विभाग से जो धनराशि मिली थी, उसका सदुपयोग हुआ या नहीं। जिले भर में चले इस अभियान में अभी तक 536 प्रधानों की पोल खुल चुकी है। फिलहाल विभागीय अधिकारियों की नजर अब कुंडा, बाबागंज और बिहार ब्लाकों के ग्राम पंचायतों पर है। खंड प्रेरकों की ओर से जो रिपोर्ट मिली है, उसमें सबसे अधिक दुरुपयोग इन्हीं ब्लाकों में हुआ है। फिलहाल अधिकारी विभागीय कर्मचारियों के माध्यम से गांव में बने शौचालयों की गहनता से जांच कर रहे हैं।
आधे-अधूरे पड़े हैं अभी शौचालय
सदर विकास खंड के भीलमपुर ग्राम पंचायत ही नहीं, बल्कि जहनईपुर, टेऊंगा, कोहड़ा, सलेमपुर भदारी सहित अनेक ग्राम पंचायतों में अभी भी शौचालय अधूरे पड़े हुए हैं। कुछ शौचालयों में सीट नहीं है, तो कुछ भी गड्ढा ही नहीं बनाया गया है। गांव के लोगों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति शौचालय का प्रयोग भी करना चाहे, तो कैसे करें। फिलहाल इस दिशा में ब्लाक के स्तर से कोई प्रयास नहीं हो रहा है।
1.06 लाख परिवारों को अभी बनना है शौचालय
जिले में 1.06 लाख परिवार ऐसेे हैं, जिनके घर में अभी शौचालय नहीं बना है। डीपीआरओ के सर्वे में इन परिवारों को योजना का पात्र माना गया है। विभाग ने शासन से शौचालय बनाने के लिए धनराशि की मांग की है। विभाग का दावा है कि चालू वित्तीय वर्ष में धनराशि मिलते ही निर्माण का कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
शौचालय निर्माण के लिए जिन ग्राम पंचायतों को धनराशि दी गई है, उसकी जांच कराई जा रही है। अगर किसी प्रधान ने दुरुपयोग किया है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। जो प्रधान रुपये को डंप किए हुए हैं, उन्हें उपयोग करने का मौका दिया गया है।
उमाकांत पांडेय, डीपीआरओ