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सजने लगे मां के दरबार, कल होगी जय-जयकार

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सजने लगे मां के दरबार, कल होगी जय-जयकार
पौराणिक देवीधामों में जोर-शोर से चल रही बासंतिक नवरात्र की तैयारी, बाजारों की भी बढ़ी रंगत
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। शनिवार से शुरू हो रहे नवरात्र को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। पौराणिक देवीधामों को सजाने के साथ ही साफ-सफाई का काम तेजी से चल रहा है। शहर के पौराणिक बेल्हा देवीधाम, बाराही देवी धाम, चंद्रिकन देवीधाम को सजाया जा रहा है। रंगाई-पुताई के साथ ही बिजली की आकर्षक सजावट की जा रही है। श्रद्धालुओं की भीड़ नियंत्रित करने के लिए मुख्यद्वार से बैरिकेडिंग भी की जा रही है। ताकि किसी तरह की दिक्कत न हो। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त फोर्स के साथ ही सीसीटीवी कैमरे भी दुरुस्त किए जा रहे हैं। उधर, नवरात्र के पर्व को लेकर बाजारों की रंगत भी बढ़ गई है। शहर से लेकर गांव तक बाजारों में नारियल, बताशा व रंग-बिरंगी चुनरी दुकानों पर सज गई हैं। नवरात्र की तैयारी को लेकर दुकानदार भी जुटे हुए हैं। शहर के पंजाबी मार्केट, बाबागंज, सदर बाजार, घंटाघर, पल्टन बाजार, अंबडेकर चौराहे पर दुकानें सज गई हैं। नौ के अनुष्ठान करने वाले लोग पूजन की तैयारी में जुटे हैं। कलश स्थापना, हवन, पारण के साथ ही पूजन-पाठ के लिए उपर्युक्त मुर्हूत के लिए पंडितों से संपर्क साध रहे हैं।
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अभिजीत मुहूर्त में करें कलश स्थापना
बासंतिक नवरात्र के प्रतिपदा के दिन 6 अप्रैल को वैधृति योग सुबह सूर्योदय के बाद शुरू हो जाएगा। वैधृति योग में कलश स्थापना का विधान नहीं होता है। आचार्य पं. आलोक मिश्र ने बताया कि वैसे तो वैधृति योग रात्रि 9.21 बजे तक रहेगा। मगर इस बीच सुबह 11.35 से अभिजीत मुर्हूत का शुभारंभ होगा। उन्होंने बताया कि यह मुर्हूत दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। इस मुर्हूत में कलश स्थापना का विधान है। इस मुर्हूत में विधि-विधान से कलश स्थापना करने से अनुष्ठान को सार्थकता मिलेगी।
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एक ही दिन अष्टमी और नवमी
आचार्य पं. आलोक मिश्र ने बताया कि बासंतिक नवरात्र के महापर्व की अष्टमी व नवमी तिथि एक ही दिन पड़ रही है। 13 अप्रैल को सुबह 8.16 बजे तक अष्टमी तिथि रहेगी, इसके नवमी तिथि शुरू हो जाएगी। जिसके बाद हवन किया जा सकता है।
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दिनभर करें पारण
14 अप्रैल को सुबह छह बजे के बाद दिनभर पारण का विधान है। व्रती लोग विधि-विधान से पारण कर अपना अनुष्ठान पूर्ण करेंगे।
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