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आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण साधन है मधुमक्खी पालन

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कुंडा। राजा दिनेश सिंह कृषि विज्ञान केंद्र में विश्व मधुमक्खी दिवस मनाया गया। इसमें किसानों व मधुमक्खी पालकों को जागरूक किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ केंद्र के वरिष्ठ उद्यान वैज्ञानिक डा.सुधाकर सिंह ने स्व. राजा दिनेश सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित करके किया।
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उन्होंने किसानों को बताया कि उत्पादन एवं आय बढाने के उद्देश्य से मधुमक्खी पालन एक महत्वपूर्ण साधन है। लगभग 85 प्रतिशत फसलों के पौधे क्रास-पोलिनेटेड होते हैं और उन्हें बाहरी एजेंट की मदद से एक ही प्रजाति के अन्य पौधों से पराग प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। परागण की बहुतायत बीज की जल्दी स्थापना में मदद करती है। इसके परिणामस्वरूप जल्दी और एक समान फसल की पैदावार होती है। मधुमक्खी शहद, मोम और शाही जेली भी पैदा करती है। इससे किसानों को अतिरिक्त लाभ होता है। यतेन्द्र कुमार ने बताया कि शहद न केवल औषधीय गुणों से भरपूर है बल्कि यह पूर्ण भोजन भी है। शहद के अलावा इसके अन्य उत्पादों से दवाओं का निर्माण होता है। सौंदर्य प्रसाधन के निर्माण में औद्योगिक स्तर पर भी इस्तेमाल होता है। इसलिए खेती के साथ किसानों के लिए मधुमक्खी पालन में अपार सम्भावनाएं हैं।

केन्द्र के वैज्ञानिक डा. भाष्कर शुक्ला ने किसानों को फसलों तथा बागों में सुरक्षित दवा डालने की सलाह दी। बताया कि मधुमक्खियों को हानि पहुंचेगी तो परागगण को भी नुकसान पहुंचेगा। कार्यक्रम के दौरान मधुमक्खी पालक दृगपाल मौर्या ने शहद विक्रय एवं प्रदर्शन हेतु स्टाल लगाया तथा बेरोजगार नवयुवकों को मधुमक्खी पालन में रोजगार की सम्भानाओं को बताया। कार्यक्रम में दृगपाल मौर्या, त्रिभुवन नाथ यादव, शत्रुघन यादव, बजंरग मौर्या, राधेश्याम मौर्य, ओम प्रकाश मौर्य, अशोश्क पटेल, रेखा मौर्या, सरोज यादव आदि मौजूद रहे। कृषि विज्ञान केंद्र के स्टाफ डा. श्रीमती स्वाती दीपक, प्रदीप सिंह, डा. रणजीत सिंह, प्रशान्त उपाध्याय, यतेन्द्र कुमार, विनोद चौरसिया, जुगल किशोर, जीआर पटेल, रविशंकर, अरुण शुक्ला आदि ने सहयोग किया।
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