सांसद ने किया निर्माणाधीन गंगा घाट का निरीक्षण
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आजादी के बाद से गंबगा सफाई के नाम पर हजारों करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन कोई परिवर्तन नहीं हुआ। केवल पैसा साफ हुआ। गंगा पहले की तरफ बनी रही। देश के पांच मूल आधार हैं। गांव, गरीब, गंगा, गीता व गाय। इन सभी का संरक्षण जरूरी है। केंद्र में मोदी सरकार आते ही गंगा सफाई के लिए 20 हजार करोड़ रुपये के बजट के साथ नमामि गंगे परियोजना बनाई गई।
गंगा नदी में गंदे नालों को बंद करने व गंगा के किनारे प्रमुख धार्मिक स्थलों में पक्के घाट बनाने के साथ ऐतिहासिक धरोहर के रूप में पूर्व से मौजूद जीर्ण-शीर्ण गंगा घाटों को मरम्मत करने के लिए देश की बड़ी ईआईएल कंपनी से प्रोजेक्ट मांगा गया। यह बातें कौशाम्बी सांसद व अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद सोनकर ने रविवार को मानिकपुर के शहाबाद घाट के निरीक्षण के दौरान कहीं। उन्होंने लोगों को बताया कि लोकसभा में कांग्रेस के लोगों ने प्रश्न उठाया कि एक साल हो गया अभी तक 450 करोड़ रुपये ही खर्च हुए। इस पर केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि गंगा को साफ करना है न कि पैसा साफ करना है।
उनके इस जवाब पर विपक्ष मौन हो गया। सांसद विनोद ने कहा कि मानिकपुर में पूर्व में बने किलेनुमा घाट जीर्ण शीर्ण हो गए थे। सांसद बनने के बाद इसकी भव्यता बढ़ाने के प्रयास के रूप में 11.21 करोड़ की लागत से मानिकपुर में चार घाट अमेठी घाट, सरस्वती घाट, राम जानकी घाट व किला टाट पक्का घाट का सौंदर्यीकरण पिछले 8 महीने से चल रहा है। 31 जनवरी तक सभी घाट बन जाएंगे। घाट के बगल ऊपर पक्की सीमेंटेट सडक़ बनाई जाएगी।
50 फुट ऊंचाई वाले 11 हाईमास्ट की रोशनी से पूरा परिसर प्रकाशमय रहेगा। 30 सोलर लाइट भी लगाई जाएंगी। घाट पर सांसद विनोद सोनकर ने पौधरोपण किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिला उपाध्यक्ष बृज किशोर त्रिपाठी ने केंद्र व प्रदेश सरकार के कार्यों के बारे में बताया। संचालन गया प्रसाद पांडेय ने किया। इस दौरान उपजिलाधिकारी विजय पाल सिंह, सांसद मीडिया प्रभारी भूपेन्द्र पांडेय, जिला उपाध्यक्ष राजन मिश्र, सरोज त्रिपाठी, कमलेश सोनकर, अतुल मिश्र, डा. डी शुक्ल, प्रकाशचंद्र आदि मौजूद रहे।