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एक नर्स के जिम्मे 100 मरीज

Tue, 23 Dec 2014 10:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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जिला अस्पताल इन दिनों नर्स की कमी से जूझ रहा है।  एक नर्स पर 100 मरीजों की देखभाल का जिम्मा होता है। इससे जहां मरीज की सही देखभाल नहीं हो पाती वहीं दौड़भाग से परेशान नर्सें चिड़चिड़ी हो जाती हैं और छोटी-छोटी बातों पर रोगियों और तीमारदारों उलझ जाती हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों ने कई बार इसकी शिकायत की पर स्वास्थ्य विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। जिला अस्पताल में 20 नर्स तैनात हैं। एक मैट्रेन और दो नर्स पर्चा काउंटर पर ड्यूटी करती हैं। एक नर्स की ड्यूटी ओटी में होती है। इसके बाद 16 नर्सें बचती हैं। तीन शिफ्ट में इनकी ड्यूटी लगाई जाती है।  साप्ताहिक छुट्टी भी इनको दी जाती है। मेडिकल वार्ड में 35 बेेड हैं।  उसी के बगल चिल्ड्रेन वार्ड में 40 बेड हैं। इस तरह दोनों वार्डों को मिलाकर 75 बेड हैं। सप्ताह में दो दिन एक ही नर्स को दोनों वार्डों में भर्ती मरीजों की देखभाल करनी पड़ती है। आने वाला मरीज जब तक शिफ्ट होता है तब तक दूसरा मरीज आ जाता है। इसके चलते भर्ती मरीज को देखभाल में कठिनाई होती है। यही हालत सर्जिकल महिला और सर्जिकल पुरुष वार्ड की है। दोनों वार्डों में 80 बेड हैं।
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सर्जिकल महिला वार्ड के बगल स्थित पेइंगवार्ड में छह बेड हैं जब कि बर्न वार्ड में चार और एनएसयू वार्ड में 6, पीटीसी वार्ड में 5 बेड लगे हैं। इन 100 बेड के मरीजों और छह वार्ड में जाकर देखभाल का  जिम्मा दो नर्सों पर होता है। सप्ताह में दो दिन एक ही नर्स को सभी मरीजों की देखभाल करनी पड़ती है। इससे नर्स इधर-उधर वार्ड में टहलती रह जाती हैं। वह किसी मरीज की देखभाल नहीं कर पाती हैं। इमरजेंसी और प्राइवेट वार्ड की ड्यूटी एक नर्स के सहारे है। इससे जहां मरीज को दवा मिलने में असुविधा होती है वहीं नर्स को 100 बेड पर भर्ती मरीजों की देखभाल के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सर्जिकल महिला वार्ड में भर्ती अंतू बाजार निवासी रेखा ने बताया कि वह तीन दिनों से यहां है। उसका ऑपरेशन हुआ है। ग्लूकोज खत्म हो जाने के बाद उसके परिजनाें को ही बदलना पड़ता था। इसी तरह बर्न वार्ड में भर्ती बेगम वार्ड निवासी नियाज ने बताया कि वह दर्द से तड़प रहा था। ग्लूकोज का बोतल खत्म हो गया। परिजन भी उस समय नहीं थे। ब्लड निकलने लगा। उसने खुद किसी तरह ग्लूकोज (ड्रिप) बंद किया। इसके बाद उसका ब्लड बंद हुआ। प्राइवेट वार्ड में भर्ती अमरावती पत्नी ननकू के परिजनों ने बताया कि उसने प्राइवेट वार्ड का पैसा जमा किया है। मरीज को दिक्कत होने के बाद नर्स को सूचना दी जाती है। नर्स को पहुंचने में कम से कम 30 मिनट का समय लग जाता है।
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