पीलीभीत। पीटीआर के जंगल से सटे इलाकों में घूम रहे बाघों पर विभाग के साथ डब्ल्यूटीआई की टीम भी नजर रखेगी। टीम बाघों के व्यवहार और अन्य गतिविधियों की निगरानी कर अध्ययन करेगी। ग्रामीणों को भी जागरूक करने पर जोर दिया जाएगा।
पीटीआर से सटे अलग-अलग इलाकों में पांच बाघों की चहलकदमी देखी जा रही है। एक माह पूर्व से पूरनपुर, मझोला और गजरौला क्षेत्र में पांच बाघ और एक तेंदुए की जंगल से बाहर लगातार मौजदूगी बनी है। कई ऐसे बाघ है जो लंबे समय से जंगल से बाहर ही डेरा जमाए हैं।
पीटीआर के साथ सामाजिक वानिकी की टीम नियमित निगरानी कर स्थिति को परख रही है। हालांकि बाघ एक स्थान पर न रुककर क्षेत्र में चहलकदमी कर रहे हैं। इसको देखते हुए अब पीटीआर की सहयोगी संस्था डब्ल्यूटीआई भी गंभीर हुई है। जंगल से बाहर घूम रहे बाघों के व्यवहार और गतिविधियों को जानने के लिए टीम नियमित रूप से उनपर नजर रखकर अध्ययन करेगी।
जंगल से बाहर आकर रुकने की परिस्थितियों के साथ मानव के प्रति बाघ का रवैया समेत अन्य बिंदुओं पर पड़ताल करेगी। डब्ल्यूटीआई की दिव्य चटर्जी ने बताया कि जंगल से बाहर घूम रहे बाघों की व्यवहार समेत अन्य गतिविधियों को जानने के लिए अध्ययन किया जाएगा। इसको लेकर रूपरेखा तैयार की गई है।