पीलीभीत टाइगर रिजर्व से सटे सेल्हा और पुरैना गांवों की महिलाओं की मेहनत रंग ला रही है। शहद की गुणवत्ता, पैकिंग और विपणन (मार्केटिंग) की जिम्मेदारी संभाल रहीं महिलाओं की मेहनत अब पीलीभीत जिले की सीमाओं से बाहर निकलकर दिल्ली और झांसी तक अपनी पहचान बना चुकी है। ‘तराई हनी’ नाम से बिक रहा यह शहद महिला सशक्तीकरण का सशक्त उदाहरण बन गया है।
माधोटांडा क्षेत्र में पीलीभीत टाइगर रिजर्व पीटीआर की बराही रेंज से सटे सेल्हा और पुरैना गांवों में वर्ष 2023 में शहद उत्पादन की पहल शुरू की गई थी। इस प्रोजेक्ट के तहत गांव के करीब 30 पुरुषों को शहद उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया, जबकि तैयार शहद की गुणवत्ता जांच, पैकिंग और बिक्री का जिम्मा महिलाओं के समूह ने संभाल लिया।
महिलाओं ने दिया तराई हनी नाम
यह पहल डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और पीटीआर के सहयोग से संचालित की जा रही है। पुरुषों द्वारा तैयार शहद को गांव की महिलाएं सामूहिक रूप से खरीदती हैं और फिर उसे आधुनिक तरीके से पैक कर बाजार में उतारती हैं। महिलाओं ने अपने उत्पाद को तराई हनी नाम दिया है, जो अब गुणवत्ता और स्वाद के कारण लोगों के बीच लोकप्रिय होता जा रहा है।
समिति से जुड़े हर्षित मंडल के अनुसार फिलहाल 50 ग्राम से लेकर 500 ग्राम तक की पैकिंग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। 50 ग्राम शहद की कीमत करीब 30 रुपये रखी गई है, जबकि 500 ग्राम पैक की बिक्री 300 रुपये तक की जा रही है। इसके अलावा 100 और 200 ग्राम की पैकिंग भी उपलब्ध है, ताकि हर वर्ग के उपभोक्ता तक उत्पाद पहुंच सके।
स्थानीय महिलाओं का कहना है कि शुरुआत में बिक्री केवल पीलीभीत तक सीमित थी, लेकिन अब दिल्ली और झांसी जैसे शहरों से भी मांग आने लगी है। बढ़ती मांग से महिलाओं की आय में इजाफा हुआ है और वे आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।