क्वाटर फाइनल में ही दिखे थे सिमरजीत के तेवर
जूनियर हॉकी में विश्व चैंपियन बनने वाली टीम में शामिल सिमरनजीत ने केवल फाइनल में गोल दागकर टीम को जीत नहीं दिलाई, बल्कि क्वाटर फाइनल में भी गोला दागा था। जिसके बदौलत टीम इंडिया सेमी फाइनल में पहुंची थी। जूनियर हॉकी टीम की जीत से सिमरनजीत के घर मझारा फार्म और मझोला में खुशियों का माहौल है। रविवार को लखनऊ में हुए जूनियर हॉकी विश्वकप के 22वें मिनट में रिवर्स शॉट से गोलकर हीरो बने सिमरनजीत मूलरूप से पीलीभीत जनपद के निवासी हैं। मझोला क्षेत्र गांव मझारा फार्म निवासी इकबाल सिंह व मंजीत कौर के घर 27 दिसंबर 1996 को जन्मे थे। सिमरनजीत सिंह ने कक्षा चार तक की पढ़ाई न्यूरिया और इसके बाद कक्षा छह तक की पढ़ाई मझोला के एसके पब्लिक स्कूल में की थी। पढ़ाई के साथ हॉकी के प्रति उसका लगाव देखकर ताऊ रक्षपाल सिंह उसे अपने साथ बटाला पंजाब लेकर चले गए। ताऊ ने सिमरनजीत को सुरजीत एकेडमी जालंधर में प्रवेश दिलाया। यहां पढ़ाई के साथ उसने हॉकी के गुर सीखे। जालंधर में खेलने के दौरान उसका चयन अक्तूबर 2014 अंडर-19 टीम में हुआ। इसमें उसे मलेशिया जाने का मौका मिला। मलेशिया में सिमरजीत ने अपने पहले ही अंतर्राष्ट्रीय मैच में गोल दगाकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था। मलेशिया के बाद दिसंबर 2014 में उसे आस्ट्रेलिया जाने का मौका मिला। हॉकी के प्रति जुनून और लगन ने उसे देश के अलावा अंतर्राष्ट्रीय स्तर की पहचान दी है। सिमरनजीत के गोल की बदौलत टीम इंडिया की जीत पर मझोला एवं उसके घर मझारा फार्म में खुशी का माहौल है। इस मौके पर राजपाल सिंह, हरपाल सिंह, दिलबाग सिंह, गुरमुख सिंह, सतेंद्र पाल सिंह, विक्रम सिंह, त्रिलोचन सिंह, तेजेंद्र सिंह सहित कई लोग शामिल रहे।
चार साल से नहीं आया गांव
फाइनल मुकाबला देखने परिवार के साथ लखनऊ गए सिमरनजीत के पिता इकबाल सिंह ने बताया कि सिमरनजीत का गांव आना काफी कम हो पाता है। चार पहले दो दिन के लिए गांव आया था। उम्मीद है जल्द बेटा गांव पहुंचेगा।
सीनियर टीम का हिस्सा बनने की तमन्ना
लखनऊ में हुए फाइनल मुकाबले के बाद सिमरनजीत सिंह ने अमर उजाला को फोन पर बताया कि उसकी तमन्ना सीनियर टीम में शामिल होकर देश को विश्व विजेता बनाने की है। इसके कड़ी मेहनत कर रहा हूँ।